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भरत तिवारी एनकाउंटर पर बहन का बड़ा खुलासा, बोलीं- पुलिस ने 5 गोलियां मारकर भाई की हत्या की, प्राइवेट पार्ट में भी मारी गोली

उन्होंने सरकार से मांग किया कि दोषी पुलिस वालों को सस्पेंड करने से काम नहीं चलेगा, ऐसे लोगों को फांसी पर लटकाया जाए। दफा 302 लगाया जाए ताकि जिन्दगी भर याद रखेगा कि फर्जी एनकाउंटर करने का क्या हश्र होता है?

बिहार न्यूज
दोषी पुलिसवालों पर कार्रवाई की मांग
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

ARRAH: 28 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी की 17 जून 2026 को पुलिस एनकाउंटर के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी। भरत भूषण तिवारी बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव के रहने वाले थे। इस घटना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है, वही गांव के लोग भी पुलिस की कार्यशैली को लेकर हैरान और परेशान हैं। बिहार पुलिस की इस कार्रवाई पर मृतक भरत भूषण तिवारी की बहन ने बड़ा खुलासा किया है। मीडिया से बातचीत करते हुए बहन ने कहा कि “मेरे भाई को 5 गोली मारकर पुलिस ने गांव में ही जान से मार डाला था। उसके प्राइवेट पार्ट में भी गोली मारी गई थी।”


मृतक भरत तिवारी की बहन ने बताया कि भाई को 5 गोली शरीर में सटाकर पुलिस वालों ने मारा था। उनके प्राइवेट पार्ट्स में भी गोली मारी गयी थी। एक गोली अंदर से निकलकर बाहर चला गया लेकिन चार गोली अंदर ही था। मेरे भाई को पुलिस वालों ने गांव में पकड़कर बहुत मार मारा। गोली लगने के बाद वो गिर पड़े थे। उसे तड़पता देख मां और भाभी बचाने के लिए आगे बढ़ी तब पुलिस वाले बोलने लगे कि दोनों लेडिज को मारो, इसको हटाओ यहां से।


मृतक की बहन ने बताया कि दस मिनट तक मेरे भाई की लाश को घटनास्थल पर ही रखा गया। सब ने मेरे भाई को मारकर मुआ दिया, तब मुआने के बाद आरा लेकर भागा। घर के किसी सदस्य को सटने नहीं दिया गया। जब हम लोग आरा अस्पताल गये तब पुलिस वालों ने कहा कि इलाज चल रहा है। लेकिन पांच मिनट के बाद उसे पटना लेकर चला गया। जब हम पीछे-पीछे पटना के पीएमसीएच गये तो देखा कि जहां मृत लोगों को रखा जाता है वही मेरे भाई को रखा गया था।


भरत तिवारी की बहन ने बताया कि शव को छोड़कर पुलिस कर्मी अस्पताल से चले गये थे। शव के पास कोई नहीं था। पूछे जाने पर पता चला कि इनकी मौत हो चुकी थी, इसलिए यहां शवों के साथ रखा गया। बहन ने कहा कि पुलिस मुंह दिखाने लायक नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग किया कि दोषी पुलिस वालों को सस्पेंड करने से काम नहीं चलेगा, ऐसे लोगों को फांसी पर लटकाया जाए। दफा 302 लगाया जाए ताकि जिन्दगी भर याद रखेगा कि फर्जी एनकाउंटर करने का क्या हश्र होता है? बिहार के पुलिस वालों ने एक निर्दोष सामाजिक कार्यकर्ता को जिस तरह से मारा है, वो कही से भी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि दोषियों को फांसी की सजा मिले ताकि इस तरह का फेक एनकाउंटर दोबारा ना हो।