PATNA: अनुकंपा पर बहाल 3 प्रखंड और नगर शिक्षकों को नियमित वेतनमान देने के मामले में पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिला अनुकंपा समिति की अनुशंसा में हुई प्रशासनिक देरी का खामियाजा मृत कर्मियों के आश्रितों को नहीं भुगतना पड़ेगा।
न्यायमूर्ति हरिश कुमार की एकलपीठ ने शिक्षा विभाग द्वारा याचिकाकर्ताओं के दावे खारिज करने वाले आदेशों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए निरस्त कर दिया। साथ ही, शिक्षा विभाग को तीन माह के भीतर नियमित वेतनमान सहित सभी परिणामी लाभ देने पर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया।
तीन याचिकाओं पर एक साथ हुई सुनवाई
अदालत ने सुजीत कुमार चौधरी, पंकज कुमार और मनोज कुमार की अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं के पिता वर्ष 2006 से पहले सेवा के दौरान दिवंगत हो गए थे।
याचिकाकर्ताओं ने समय पर अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन सरकारी स्तर पर लगी रोक और प्रशासनिक विलंब के कारण उनकी अनुशंसा 1 जुलाई 2006 के बाद हुई। इसके बाद उन्हें नियमित शिक्षक के बजाय निश्चित मानदेय पर प्रखंड/नगर शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया।
प्रशासनिक देरी के लिए आश्रित जिम्मेदार नहीं
हाई कोर्ट ने कहा कि जिला अनुकंपा समिति की अनुशंसा कब होगी, यह पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया है। यदि प्रशासनिक देरी होती है तो उसका दंड आश्रितों को नहीं दिया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों को राज्य सरकार नियमित वेतनमान और नियमित नियुक्ति का लाभ दे चुकी है, तो याचिकाकर्ताओं को उससे वंचित रखना समानता के अधिकार का उल्लंघन होगा।
2018 के सरकारी परामर्श का भी हवाला
कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार 12 जनवरी 2018 के परामर्श (मेमो-38) के आधार पर समान मामलों में नियमित नियुक्ति और वेतनमान का लाभ दे चुकी है। ऐसे में कुछ कर्मचारियों को लाभ देना और अन्य समान पात्र लोगों को उससे वंचित रखना कानून सम्मत नहीं है।
तीन माह में नियमित वेतनमान पर निर्णय
हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव और प्राथमिक शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के मामलों पर समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों के अनुरूप पुनर्विचार कर तीन माह के भीतर नियमित वेतनमान सहित सभी परिणामी लाभ देने पर निर्णय लें। अदालत ने याचिकाकर्ताओं के दावे खारिज करने वाले सभी आदेशों को निरस्त कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले को अनुकंपा पर बहाल शिक्षकों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।





