ब्रेकिंग
Bihar News : अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार: 11 साल पुरानी अदावत फिर सुर्खियों में, 2015 की मोकामा लड़ाई से AK-47 विवाद तक जानिए पूरी कहानीBihar News: बिहार में 50 से ज्यादा ट्रेनें रद, हावड़ा-पटना समेत कई ट्रेनों का बदला रूट; 21 सितंबर से 4 अक्टूबर तक असरBihar News : धान-मक्का से केला तक तबाह, बिहार में 270 करोड़ की फसल का नुकसान; किसानों को कितना पैसा मिलेगा?Bihar News : 3 डिसमिल मुफ्त जमीन के लिए पटना में क्यों उमड़ी हजारों महिलाओं की भीड़? 8 हजार आवेदन के बाद सरकार ने दिया बड़ा निर्देशBihar News : बिहार की तरक्की के पीछे कौन? CM सम्राट ने बताए 3 बड़े नामBihar News : अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार: 11 साल पुरानी अदावत फिर सुर्खियों में, 2015 की मोकामा लड़ाई से AK-47 विवाद तक जानिए पूरी कहानीBihar News: बिहार में 50 से ज्यादा ट्रेनें रद, हावड़ा-पटना समेत कई ट्रेनों का बदला रूट; 21 सितंबर से 4 अक्टूबर तक असरBihar News : धान-मक्का से केला तक तबाह, बिहार में 270 करोड़ की फसल का नुकसान; किसानों को कितना पैसा मिलेगा?Bihar News : 3 डिसमिल मुफ्त जमीन के लिए पटना में क्यों उमड़ी हजारों महिलाओं की भीड़? 8 हजार आवेदन के बाद सरकार ने दिया बड़ा निर्देशBihar News : बिहार की तरक्की के पीछे कौन? CM सम्राट ने बताए 3 बड़े नाम

Bihar News : अनंत सिंह बनाम नीरज कुमार: 11 साल पुरानी अदावत फिर सुर्खियों में, 2015 की मोकामा लड़ाई से AK-47 विवाद तक जानिए पूरी कहानी

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच सियासी तल्खी की शुरुआत 2015 में हुई। पुटूस हत्याकांड, मोकामा चुनाव, AK-47 विवाद और नार्को टेस्ट तक जानिए दोनों नेताओं के बीच विवाद की पूरी कहानी।

Bihar news
Bihar news
© Ai photo
Tejpratap
Tejpratap
9 मिनट

पटना: बिहार की राजनीति में मोकामा की सियासत का अपना अलग प्रभाव रहा है। इसी मोकामा से जुड़े दो चर्चित नाम—अनंत सिंह और नीरज कुमार—एक बार फिर आमने-सामने हैं। इस बार मामला केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि पुराने विवाद, 2019 के AK-47 प्रकरण और आगामी पटना स्नातक विधान परिषद चुनाव तक पहुंच गया है।


अनंत सिंह ने जेडीयू के एमएलसी नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। दूसरी ओर नीरज कुमार ने भी आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि यदि आरोपों के पीछे कोई प्रमाण है तो अदालत का रुख किया जाना चाहिए। इस ताजा टकराव ने दोनों नेताओं के बीच करीब 11 साल पुराने राजनीतिक विवाद को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


1. विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच मौजूदा तनाव को समझने के लिए 2015 के दौर में जाना जरूरी है। उस समय बिहार में महागठबंधन की सरकार थी और मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह का प्रभाव काफी चर्चा में था।


जून 2015 में पुटूस हत्याकांड के मामले में अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई। इसके कुछ महीने बाद विधानसभा चुनाव आया। इसी चुनाव में जेडीयू ने मोकामा से अनंत सिंह के बजाय नीरज कुमार को मैदान में उतारा।


यह चुनाव दोनों नेताओं के बीच सीधे राजनीतिक मुकाबले में बदल गया। नीरज कुमार जेडीयू के टिकट पर मैदान में थे, जबकि अनंत सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे। नतीजे में अनंत सिंह ने नीरज कुमार को 18,348 वोटों के अंतर से हराया।  यहीं से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी और स्पष्ट होती चली गई।


2. चुनावी मुकाबला धीरे-धीरे व्यक्तिगत टकराव में बदला

2015 के चुनाव के दौरान दोनों ओर से एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक हमले किए गए। नीरज कुमार ने अनंत सिंह की राजनीति और उनके आपराधिक मामलों को लेकर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए।


दूसरी तरफ अनंत सिंह के खेमे में यह धारणा बनी कि नीरज कुमार लगातार उनके राजनीतिक विरोध में खड़े रहे।


समय बीतने के साथ दोनों अलग-अलग राजनीतिक भूमिकाओं में नजर आए, लेकिन पुरानी तल्खी पूरी तरह खत्म नहीं हुई। यही वजह है कि जब भी दोनों के बीच कोई नया विवाद सामने आया, 2015 की राजनीतिक भिड़ंत का संदर्भ फिर सामने आ गया।


3. 2019 का AK-47 मामला क्यों बना सबसे बड़ा मोड़?

दोनों नेताओं के बीच विवाद में सबसे महत्वपूर्ण अध्याय 2019 में आया। दरअसल, अगस्त 2019 में पुलिस ने बाढ़ अनुमंडल के लदमा गांव स्थित अनंत सिंह के पैतृक आवास पर छापेमारी की थी। पुलिस के मुताबिक वहां से AK-47 राइफल, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद किए गए थे। इस मामले में अनंत सिंह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई और उन्होंने बाद में दिल्ली की अदालत में आत्मसमर्पण किया था।


अनंत सिंह ने उस समय भी खुद को फंसाए जाने का आरोप लगाया था। हालिया विवाद में उन्होंने फिर दावा किया है कि उनके घर में हथियार रखवाने के पीछे नीरज कुमार की भूमिका थी।


हालांकि यह बात महत्वपूर्ण है कि यह अनंत सिंह का आरोप है, जिसे नीरज कुमार ने खारिज किया है। नीरज कुमार ने कहा है कि अगर आरोप लगाने वाले के पास प्रमाण हैं तो उन्हें अदालत में पेश किया जाना चाहिए।


4. AK-47 केस में बाद में क्या हुआ?

यह मामला आगे अदालत तक पहुंचा। विशेष अदालत से अनंत सिंह को सजा हुई और उनकी विधानसभा सदस्यता भी चली गई थी। इसके बाद उन्होंने फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी।


अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट से उन्हें इस मामले में राहत मिली और वह जेल से बाहर आए। इसलिए 2019 की घटना को आज के राजनीतिक विवाद में संदर्भ के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन पुराने मामले की न्यायिक स्थिति और वर्तमान राजनीतिक आरोपों को अलग-अलग समझना जरूरी है।


5. 'पुदीना सिंह' वाले तंज से भी बढ़ी दूरी

दोनों नेताओं के बीच तल्खी सिर्फ चुनाव और कानूनी मामलों तक सीमित नहीं रही। सार्वजनिक बयानों में भी एक-दूसरे पर तीखे तंज देखने को मिले।


मोकामा इलाके में चल रहे इस विवाद के बीच स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, नीरज कुमार द्वारा अनंत सिंह के लिए 'पुदीना सिंह' जैसे नाम का इस्तेमाल भी दोनों के बीच बढ़ती व्यक्तिगत तल्खी का एक कारण बताया गया है। इस तरह के बयानों ने राजनीतिक विरोध को और व्यक्तिगत रंग दिया।


6. जेडीयू में वापसी के बाद भी नहीं मिटा मतभेद

समय के साथ राजनीतिक समीकरण बदले। अनंत सिंह दोबारा जेडीयू से जुड़े और मोकामा की राजनीति में सक्रिय रहे।


लेकिन पार्टी में वापसी के बावजूद नीरज कुमार के साथ उनके पुराने मतभेद खत्म नहीं हुए। यही वजह है कि मौजूदा MLC चुनाव के दौरान पुरानी घटनाएं एक बार फिर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई हैं।


7. MLC चुनाव ने पुराने विवाद को फिर दे दी हवा

2026 में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी चुनाव की चर्चा के बीच नीरज कुमार का नाम सामने आया। इसी दौरान अनंत सिंह ने स्पष्ट कर दिया कि वह नीरज कुमार के समर्थन में खड़े नहीं होंगे।


रिपोर्टों के मुताबिक, अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ चुनावी मोर्चा लेने और निर्दलीय डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करने की बात कही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका विरोध जेडीयू से नहीं बल्कि नीरज कुमार से है।


8. नार्को टेस्ट की चुनौती से विवाद और गरमाया

ताजा विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा AK-47 मामले और नार्को टेस्ट की चुनौती को लेकर हुई।अनंत सिंह ने पुराने आरोप को दोहराते हुए नीरज कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए नार्को टेस्ट की बात कही।


इसके जवाब में नीरज कुमार ने आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रमाण है तो अदालत में जाना चाहिए। यानी दोनों पक्षों के बीच अब राजनीतिक बयानबाजी के साथ कानूनी प्रक्रिया का संदर्भ भी जुड़ गया है।


9. पार्टी के अंदर सुलह की कोशिश भी हुई

जबकि शुरुआती दिनों विवाद सामने आने के बाद जेडीयू के स्तर पर दोनों नेताओं के बीच मतभेद दूर करने की कोशिश की गई। सितंबर की शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच बैठक भी हुई थी।


हालांकि इसके बाद भी सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी पूरी तरह बंद नहीं हुई। यही कारण है कि पटना स्नातक एमएलसी चुनाव के पहले यह विवाद जेडीयू के भीतर चर्चा का विषय बना हुआ है।


10. 11 साल में बदले कई समीकरण, लेकिन विवाद कायम

अगर पूरे घटनाक्रम को एक साथ देखें तो अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद किसी एक बयान या एक चुनाव का परिणाम नहीं है। बल्कि 2015 में मोकामा विधानसभा चुनाव, 2019 में AK-47 प्रकरण, इसके बाद दोनों नेताओं के बीच लगातार राजनीतिक बयानबाजी, और अब 2026 के पटना स्नातक MLC चुनाव ने पुराने विवाद को फिर सामने ला दिया है।


इस बीच दोनों नेताओं की राजनीतिक यात्राओं में कई बदलाव आए। लेकिन मौजूदा चुनावी परिस्थिति ने पुराने मतभेदों को फिर सक्रिय कर दिया है।


आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि पटना स्नातक एमएलसी चुनाव के दौरान अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच यह टकराव किस दिशा में जाता है। एक तरफ अनंत सिंह खुलकर नीरज कुमार के खिलाफ खड़े होने की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर नीरज कुमार आरोपों को खारिज करते हुए सबूत और अदालत की बात कर रहे हैं।


इस पूरे विवाद में AK-47 मामले से जुड़े पुराने आरोप फिर चर्चा में हैं, लेकिन मौजूदा समय में दोनों नेताओं के बीच जो आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं, उन्हें उनके संबंधित दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। चुनावी राजनीति के साथ-साथ अब इस विवाद की अगली दिशा पर भी सबकी नजर है।