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Bihar News : धान-मक्का से केला तक तबाह, बिहार में 270 करोड़ की फसल का नुकसान; किसानों को कितना पैसा मिलेगा?

Bihar Flood 2026: बिहार में बाढ़ से 18 जिलों की करीब 270 करोड़ रुपये की फसल बर्बाद हुई। किसानों को 8,500 से 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक इनपुट अनुदान मिलेगा। जानें पूरा नियम।

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Tejpratap
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Bihar News : बिहार में इस साल आई बाढ़ ने सिर्फ जनजीवन को ही प्रभावित नहीं किया, बल्कि खेतों में खड़ी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कृषि विभाग को अब तक मिली शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 18 बाढ़ प्रभावित जिलों में करीब 270 करोड़ रुपये मूल्य की फसल बर्बाद होने का अनुमान है। हालांकि, यह नुकसान अभी अंतिम नहीं माना जा रहा है। बाढ़ का पानी पूरी तरह उतरने के बाद खेतों का दोबारा सर्वे किया जाएगा, जिसके बाद वास्तविक क्षति का आंकड़ा बढ़ सकता है।


शुरुआती आकलन के अनुसार राज्य के 102 प्रखंडों में लगभग 1.76 लाख हेक्टेयर फसल बाढ़ की चपेट में आई है। अगस्त के अंतिम सप्ताह में गंगा, पुनपुन, गंडक, सोन और कोसी समेत कई नदियों के जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पानी फैल गया था। इसका सीधा असर किसानों की तैयार और खड़ी फसलों पर पड़ा।


भागलपुर और भोजपुर में सबसे ज्यादा नुकसान

फसल क्षति के मामले में भागलपुर जिला सबसे आगे है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार जिले के 15 प्रखंडों में करीब 45 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है। इसके बाद भोजपुर में छह प्रखंडों में लगभग 25 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है।


वहीं बेगूसराय में करीब 21 हजार हेक्टेयर और समस्तीपुर में लगभग 10 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट है। पटना, वैशाली, खगड़िया, बक्सर, लखीसराय, रोहतास, सारण, कटिहार, पश्चिम चंपारण, मुंगेर, अरवल, शेखपुरा और पूर्णिया समेत कई अन्य जिलों में भी फसलों पर बाढ़ का असर पड़ा है।


सबसे ज्यादा प्रभावित फसलों में धान, मक्का, सब्जियां और केला शामिल हैं। कई इलाकों में खेत लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण फसल के पूरी तरह नष्ट होने की स्थिति बनी है।


33 फीसदी से ज्यादा नुकसान पर मिलेगा इनपुट अनुदान

बाढ़ से प्रभावित किसानों के लिए राहत का प्रावधान किया गया है। आपदा राहत के नियमों के अनुसार किसी किसान की फसल में 33 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर इनपुट अनुदान दिया जाता है। इसके लिए नुकसान का आकलन और संबंधित प्रक्रिया पूरी की जाएगी।


अनुदान की राशि फसल और जमीन की स्थिति के आधार पर अलग-अलग होगी। असिंचित क्षेत्र में फसल नुकसान पर 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और सिंचित क्षेत्र में 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर इनपुट अनुदान देने का प्रावधान है।


वहीं बहुवर्षीय फसल, जैसे गन्ना आदि में नुकसान होने पर 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक अनुदान का प्रावधान है। एक किसान को अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र के लिए इनपुट अनुदान दिया जा सकता है।


न्यूनतम अनुदान की भी व्यवस्था

सरकार ने किसानों के लिए न्यूनतम सहायता राशि का भी प्रावधान रखा है। असिंचित क्षेत्र में पात्र किसान को कम से कम 1,000 रुपये, सिंचित क्षेत्र में कम से कम 2,000 रुपये और बहुवर्षीय फसल के मामले में न्यूनतम 2,500 रुपये अनुदान दिया जा सकता है।


इसके अलावा कृषि विभाग प्रभावित किसानों को अगली फसल के लिए मदद देने की तैयारी में भी है। आकस्मिक फसल योजना के तहत अगात मटर, आगत सरसों और रबी मक्का के बीज प्रभावित किसानों को नि:शुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान है।


अंतिम सर्वे के बाद साफ होगी नुकसान की तस्वीर

फिलहाल कृषि विभाग के पास उपलब्ध आंकड़े प्रारंभिक हैं। बाढ़ का पानी पूरी तरह निकलने के बाद खेतों में जाकर क्षति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में कितने क्षेत्र में कितनी फसल बर्बाद हुई।


ऐसे में किसानों के लिए राहत की राशि तय करने में अंतिम सर्वे की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बाढ़ से फसल गंवाने वाले पात्र किसानों को सरकारी नियमों के तहत अनुदान और अगली फसल के लिए बीज सहायता मिलने की उम्मीद है।