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मृत समझकर किया दाह संस्कार: जिंदा लौटा अमर चौहान, किशनगंज में रेल पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

किशनगंज में अमर चौहान को मृत मानकर परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन बाद में वह जिंदा मिल गया। इस घटना ने रेल पुलिस की पहचान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिहार न्यूज
परिवार में खुशी की लहर
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

KISHANGANJ: किशनगंज जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने रेल पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सदर थाना क्षेत्र के मोती बाग निवासी एक युवक को मृत मानकर परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया, लेकिन बाद में वही युवक जिंदा मिल गया। घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है।


मिली जानकारी के अनुसार, मोती बाग निवासी अमर चौहान के परिजनों को बीते शुक्रवार देर रात सूचना मिली कि खगड़ा तीन नंबर रेलवे फाटक के पास वंदे भारत ट्रेन की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई है। स्थानीय लोगों ने मृतक की पहचान अमर चौहान के रूप में बताते हुए परिजनों को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलने के बाद परिजन सदर अस्पताल पहुंचे, जहां रेल पुलिस द्वारा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था।


परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम के बाद जब शव उन्हें सौंपा गया तो उन्हें पूरी तरह से शव खोलकर नहीं दिखाया गया। पुलिस और अस्पताल कर्मियों ने उन्हें बताया कि यह उनके भाई का ही शव है। इसके बाद परिवार के लोगों ने दुखी मन से शव को घर ले जाकर सनातन परंपरा के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया।


मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब अंतिम संस्कार के कुछ समय बाद परिजनों को एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने बताया कि अमर चौहान जिंदा है और पश्चिम बंगाल के पंजी पाड़ा इलाके में मौजूद है। यह खबर सुनते ही परिजन पहले तो हैरान रह गए, लेकिन तुरंत वहां पहुंचे और अमर चौहान को अपने साथ घर ले आए। इसके बाद परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।


फिलहाल अमर चौहान अपने घर पर परिवार के साथ सुरक्षित है। वहीं इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस युवक का अंतिम संस्कार किया गया, वह आखिर कौन था और उसकी सही पहचान अब कैसे की जाएगी।


स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना पूरी तरह शिनाख्त किए किसी भी शव को परिजनों को सौंप देना गंभीर लापरवाही है। इस पूरे मामले में रेल पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद बिना पर्याप्त पहचान प्रक्रिया पूरी किए ही परिजनों को सौंप दिया गया। अब लोग इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।