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बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में लागू होगा एक समान एकेडमिक कैलेंडर, इस महीने से शुरू होगी नई व्यवस्था

Bihar News: बिहार के विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र की देरी खत्म करने के लिए राज्यपाल ने एक समान एकेडमिक कैलेंडर लागू करने का आदेश दिया है। यह व्यवस्था जुलाई से प्रभावी होगी और स्नातक पाठ्यक्रमों पर लागू रहेगी।

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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: बिहार के विश्वविद्यालयों में वर्षों से चली आ रही शैक्षणिक सत्र की देरी को समाप्त करने के लिए राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में एक समान एकेडमिक कैलेंडर लागू करने का आदेश जारी किया गया है। 


यह नई व्यवस्था आगामी जुलाई से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र से प्रभावी होगी और फिलहाल स्नातक स्तर के सभी पाठ्यक्रमों पर लागू रहेगी। विशेष बात यह है कि इस एकेडमिक कैलेंडर को राज्यपाल सचिवालय ने स्वयं तैयार किया है। सभी कुलपतियों को इसे सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है, ताकि विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों में एकरूपता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके।


अब तक राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालय अपने-अपने स्तर पर शैक्षणिक कैलेंडर तैयार करते थे। इसके कारण कहीं एक माह तो कहीं एक वर्ष तक सत्र पीछे चल रहे थे। इस असमानता का सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ता था। परीक्षाओं और परिणामों में देरी के चलते उच्च शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसर भी प्रभावित होते थे।


नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र एक समान समय पर संचालित होंगे। इससे विद्यार्थियों को समय पर पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम का लाभ मिलेगा तथा उनके करियर की योजनाओं पर अनावश्यक प्रभाव नहीं पड़ेगा।


राज्यपाल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया है। अधिकारियों के अनुसार अब सभी विश्वविद्यालयों को एनईपी के प्रावधानों के अनुरूप कार्य करना होगा। शैक्षणिक गतिविधियों में अनुशासन और समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।


राज्यपाल सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि एकेडमिक कैलेंडर का अक्षरशः पालन अनिवार्य होगा। केवल अत्यंत असाधारण परिस्थितियों में ही अधिकतम सात दिनों की देरी स्वीकार की जाएगी। यदि किसी विश्वविद्यालय में निर्धारित समयसीमा से विलंब होता है, तो उसकी विस्तृत रिपोर्ट राज्यपाल सचिवालय को भेजनी होगी। शिक्षण, परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम प्रकाशन जैसे सभी कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरे करने होंगे।


भविष्य में स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों के लिए भी एक समान एकेडमिक कैलेंडर लागू करने की योजना बनाई जा रही है। कुलपतियों को इसके पालन की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे विश्वविद्यालयों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।


राज्यपाल का मानना है कि इस नई व्यवस्था से बिहार के विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक समन्वय देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों के अनुरूप स्थापित होगा। इससे उच्च शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। साथ ही विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं और अवसरों में भी लाभ मिलेगा।


नई व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एग्जिट सिस्टम को भी मजबूती प्रदान करेगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई में अधिक लचीलापन मिलेगा और शैक्षणिक गतिशीलता बढ़ेगी। विशेषज्ञ इसे बिहार में उच्च शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम मान रहे हैं।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता