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उम्मीद लड़कों से ज्यादा रखते… पास लड़कियों को कर देते हैं, इंटरमीडिएट छात्र की बेबाक लाइन पढ़कर मास्टर साहब दंग

इंटरमीडिएट परीक्षा की कॉपी जांच के दौरान एक छात्र की लिखी बेबाक लाइन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। छात्र ने उत्तर पुस्तिका में लड़कों और लड़कियों के बीच कथित भेदभाव को लेकर अपनी राय लिखते हुए खुद को पास करने की अपील की, जिसे पढ़कर शिक्षक भी

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 21, 2026, 3:43:34 PM

उम्मीद लड़कों से ज्यादा रखते… पास लड़कियों को कर देते हैं, इंटरमीडिएट छात्र की बेबाक लाइन पढ़कर मास्टर साहब दंग

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“काम लड़कों से ज्यादा कराते हैं, उम्मीद लड़कों से ज्यादा रखते हैं और एग्जाम में पास लड़कियों को कर देते हैं और नंबर भी लड़कियों को ज्यादा देते हैं।” इंटरमीडिएट के एक छात्र ने अपनी उत्तर पुस्तिका में कुछ ऐसा ही लिखकर परीक्षक का ध्यान खींच लिया। दरअसल, इतिहास विषय की कॉपी जांच के दौरान यह मामला सामने आया, जहां छात्र ने सवालों के जवाब देने के बाद अंत में यह लाइन लिख दी और खुद को पास करने की अपील भी कर दी।


जानकारी के मुताबिक, छात्र ने प्रश्नों के उत्तर सामान्य तरीके से लिखे थे। उसके जवाब न तो बहुत बेहतरीन थे और न ही पूरी तरह गलत। लेकिन जिन सवालों का जवाब उसे नहीं आता था या जिनमें वह आश्वस्त नहीं था, उनके बाद उसने अपनी बात इस अंदाज में लिख दी, जो अब चर्चा का विषय बन गई है।


कॉपी जांच के दौरान यह नोट देखकर शिक्षक भी हैरान रह गए। शिक्षक राजीव त्यागी ने बताया कि हर साल मूल्यांकन के दौरान इस तरह की कई उत्तर पुस्तिकाएं सामने आती हैं, जिनमें छात्र अपने मन की बात, भावनाएं या कभी-कभी गाने और शायरी तक लिख देते हैं। कुछ छात्र कॉपी भरने के लिए अतिरिक्त बातें लिखते हैं, जबकि कुछ सीधे परीक्षक से पास करने की अपील करते हैं।


इस मामले में भी छात्र ने अपनी सोच को खुलकर कॉपी में लिख दिया। शिक्षक के अनुसार, यह कॉपी किसी भी छात्र या छात्रा की हो सकती है, लेकिन इसमें जो लिखा गया है, उससे यह साफ झलकता है कि छात्र के मन में लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव को लेकर एक धारणा बनी हुई है।


शिक्षकों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के दौरान अक्सर छात्र दबाव में होते हैं और कई बार वे अपनी भावनाओं को इस तरह कॉपी में लिख देते हैं। हालांकि, मूल्यांकन केवल उत्तरों के आधार पर ही किया जाता है, न कि इस तरह की अपील या टिप्पणियों के आधार पर।


इधर, इस साल बोर्ड द्वारा उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में कुछ अहम बदलाव भी किए गए हैं। पहले जरूरत पड़ने पर मूल्यांकन केंद्र अपने स्तर से अतिरिक्त शिक्षकों को शामिल कर लेते थे, लेकिन इस बार नियमों को और सख्त किया गया है।


अब केवल वही शिक्षक कॉपियों की जांच कर सकते हैं, जिनका नाम सरकार द्वारा जारी अधिकृत सूची में शामिल है। बाहरी शिक्षकों को इस प्रक्रिया से पूरी तरह दूर रखा गया है, ताकि मूल्यांकन में पारदर्शिता और गोपनीयता बनी रहे।