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SUCCESS STORY: कौन है बिहार के गौतम कुमार? बिहार के खाने को दिलाई ग्लोबल पहचान, पीएम मोदी तक पहुंची थाली

बिहार के मुंगेर जिले के जमालपुर शहर से निकलकर एक युवक ने ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसकी शायद उसने बचपन में कल्पना भी नहीं की होगी। यह कहानी है गौतम कुमार की, जिनके बनाए व्यंजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक की थाली में परोसे गये।

SUCCESS STORY: कौन है बिहार के गौतम कुमार? बिहार के खाने को दिलाई ग्लोबल पहचान, पीएम मोदी तक पहुंची थाली
Tejpratap
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SUCCESS STORY: बिहार के मुंगेर जिले के जमालपुर शहर से निकलकर एक युवक ने ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसकी शायद उसने बचपन में कल्पना भी नहीं की होगी। यह कहानी है गौतम कुमार की, जिनके बनाए व्यंजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक की थाली में परोसे जा चुके हैं। 


साधारण परिवार से बड़ा सपना

गौतम कुमार का बचपन जमालपुर की संकरी गलियों में बीता। वे बताते हैं कि स्कूल जाने के लिए उन्हें हर दिन कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। आर्थिक और सामाजिक सीमाओं के बीच पले-बढ़े गौतम के मन में अक्सर यह भावना रहती थी कि वे दूसरों से अलग हैं और कहीं फिट नहीं बैठते।

जब उन्होंने शेफ बनने का फैसला किया, तब भी उन्हें कई तरह की बातें सुननी पड़ीं। उस समय छोटे शहरों में खाना बनाना अक्सर महिलाओं का काम माना जाता था। ऐसे में एक लड़के का कुकिंग को करियर बनाना लोगों को अजीब लगता था। लेकिन गौतम ने ठान लिया था कि वे अपनी अलग पहचान बनाएंगे।


बिहारी कहकर किया गया जज

जब गौतम पहली बार बिहार से बाहर प्रोफेशनल किचन में काम करने पहुंचे, तो उन्हें उनकी बोली, खान-पान और पृष्ठभूमि के कारण जज किया गया। कई लोग बिहार के खाने को साधारण समझते थे। शुरुआत में उन्होंने खुद को उस माहौल में ढालने की कोशिश की, लेकिन भीतर से वे अपनी मिट्टी और स्वाद को नहीं भूल पाए।

उन्होंने देश के कई बड़े फाइव-स्टार होटलों जैसे शांगरी-ला, द इम्पीरियल, ग्रैंड हयात, रेडिसन और मेफेयर में काम किया। यहां उन्होंने कॉन्टिनेंटल डिश, इंटरनेशनल प्लेटिंग और आधुनिक कुकिंग तकनीकें सीखीं। इन अनुभवों ने उन्हें पेशेवर रूप से मजबूत बनाया, लेकिन उनके मन में हमेशा यह सवाल रहता था कि क्या वे अपनी असली पहचान से दूर हो रहे हैं?


जड़ों की ओर वापसी

समय के साथ गौतम ने फैसला किया कि वे अपने राज्य और परंपरागत भोजन को नई पहचान देंगे। उन्होंने बाजरा और अन्य पारंपरिक अनाज, स्थानीय सब्जियां, सात्विक भोजन और कम मसालों वाले व्यंजनों पर काम शुरू किया।

उनका मानना है कि हमारे पूर्वजों का भोजन पोषण से भरपूर और पर्यावरण के लिए भी बेहतर था। फिर इसे कमतर क्यों आंका जाए? इसी सोच के साथ उन्होंने देसी और पारंपरिक व्यंजनों को आधुनिक तरीके से पेश करना शुरू किया।


आयुर्वेद और मिलेट्स को बनाया खास

साल 2023 में उन्होंने एक क्यूरेटेड आयुर्वेदिक मेनू पर काम किया। इसमें भारी और तैलीय पार्टी खाने की जगह हल्के, संतुलित और पाचन के अनुकूल व्यंजन शामिल किए गए। मौसमी सामग्री, A2 घी का उपयोग, मसालों का सही तापमान और संतुलन हर चीज पर विशेष ध्यान दिया गया। उनका फोकस सिर्फ स्वाद पर नहीं, बल्कि सेहत और संतुलन पर भी था। इसी वजह से उनका काम अलग नजर आने लगा।


G20 तक पहुंची थाली

गौतम कुमार के करियर का सबसे खास पल तब आया जब साल 2023 में दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित G20 समिट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के लिए बाजरा आधारित व्यंजन तैयार किए। यह उनके लिए सिर्फ एक पेशेवर उपलब्धि नहीं थी, बल्कि बिहार और भारतीय पारंपरिक भोजन को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाने का मौका था।