1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 06, 2026, 11:14:13 AM
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Bihar News: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) की नई वेबसाइट में आई तकनीकी समस्या के कारण लाखों छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय की नई डिजिटल प्रणाली पर करीब 15 लाख छात्रों की मार्कशीट स्कैन नहीं हो पा रही है, जिसके कारण अंकपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। इस समस्या का सीधा असर उन छात्रों पर पड़ रहा है जिनकी नौकरियां अंकपत्र सत्यापन के अभाव में अटकी हुई हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने हाल ही में लाखों रुपये की लागत से एक नई और अधिक आधुनिक वेबसाइट तैयार करवाई थी। इस वेबसाइट को पुराने पोर्टल से अधिक उन्नत बताते हुए दावा किया गया था कि इसके माध्यम से छात्रों को पढ़ाई, परीक्षा, परिणाम और प्रमाणपत्र से जुड़ी सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। हालांकि, वेबसाइट शुरू होने के कुछ समय बाद ही इसमें तकनीकी खामियां सामने आने लगीं।
सबसे बड़ी समस्या यह सामने आई है कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई मार्कशीट पर जो आधिकारिक लोगो लगा होता है, उसे नई वेबसाइट का सिस्टम स्कैन नहीं कर पा रहा है। लोगो स्कैन नहीं होने की वजह से अंकपत्रों की डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। परिणामस्वरूप, विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए गए हजारों अंकपत्रों की जांच और पुष्टि का काम रुक गया है।
विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस तकनीकी समस्या के कारण करीब 15 लाख छात्रों के अंकपत्रों का सत्यापन प्रभावित हुआ है। जिन छात्रों को सरकारी या निजी क्षेत्र की नौकरियों के लिए अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराना जरूरी है, वे इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई छात्रों की नियुक्तियां केवल इसलिए लंबित हैं क्योंकि उनके अंकपत्रों का सत्यापन अभी तक नहीं हो पाया है।
स्थिति यह हो गई है कि छात्र अपने दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बार-बार विश्वविद्यालय कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। अंकपत्रों के अलावा सैकड़ों डिग्रियां भी सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय में जमा पड़ी हैं। विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के अनुसार जब तक मार्कशीट और डिग्री का विधिवत सत्यापन नहीं होगा, तब तक किसी भी छात्र की नौकरी को स्थायी रूप से मान्यता नहीं दी जा सकती।
बीआरएबीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. राम कुमार ने बताया कि नई वेबसाइट में आई इस तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। उन्होंने कहा कि आईटी टीम लगातार इस समस्या को ठीक करने के लिए काम कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही यह दिक्कत दूर कर ली जाएगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि छात्रों को ज्यादा परेशानी नहीं होने दी जाएगी और समाधान जल्द निकालने का प्रयास जारी है।
इधर विश्वविद्यालय प्रशासन इस बात पर भी विचार कर रहा है कि जब तक नई वेबसाइट पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाती, तब तक अस्थायी तौर पर पुरानी वेबसाइट के माध्यम से ही अंकपत्रों का सत्यापन शुरू किया जाए। हालांकि, इस प्रस्ताव के सामने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियम बाधा बन रहे हैं।
यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी विश्वविद्यालय में एक समय में केवल एक ही आधिकारिक वेबसाइट सक्रिय रह सकती है। ऐसे में यदि पुरानी वेबसाइट को फिर से चालू किया जाता है तो यह नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। यही वजह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन फिलहाल इस विषय पर कानूनी और तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की प्रक्रिया में है।
इस बीच छात्र लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि तकनीकी खामी के कारण उनके भविष्य और रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।