Bihar Shop Act: बिहार में छोटे व्यवसायियों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार ने 10 से कम कर्मचारियों वाले दुकान और प्रतिष्ठानों के लिए निबंधन की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। इसके साथ ही राज्य में लागू शॉप एक्ट (बिहार दुकान एवं प्रतिष्ठान-रोजगार विनियमन और सेवा शर्त अधिनियम 2025) को खत्म कर दिया गया है।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन की सहमति के बाद इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। अब केवल उन्हीं दुकानों और प्रतिष्ठानों को पंजीकरण कराना होगा जिनमें 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत होंगे। यह नियम शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों पर भी लागू होगा।
पहले के नियमों के तहत छोटे दुकानदारों को भी एक या दो कर्मचारियों पर ही रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता था और कई मामलों में एक ही व्यवसाय के लिए अलग-अलग पंजीकरण की आवश्यकता होती थी। नए निर्णय के बाद इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है।
सरकार का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू नए लेबर कोड (उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2020) के अनुरूप यह बदलाव आवश्यक था। इससे राज्य में औद्योगिक गतिविधियों और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
राज्य सरकार ने कहा है कि दोहरे नियमों और अनावश्यक प्रक्रियाओं के कारण व्यवसायों पर बोझ बढ़ रहा था, जिसे हटाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे बिहार में नए निवेश के अवसर बढ़ेंगे और कारोबारी माहौल बेहतर होगा। चूंकि वर्तमान में विधानसभा सत्र आहूत नहीं है, इसलिए राज्यपाल की मंजूरी से यह अध्यादेश लागू किया गया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि उद्योगों, निवेशकों, स्टार्टअप और आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें, यह सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि लाइसेंस जारी करने, अनुमति देने और निरीक्षण प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए ठोस प्रस्ताव तैयार करें।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में ‘कंप्लायंस रिडक्शन एंड डिरेगुलेशन’ विषय पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि सभी विभाग डिजिटल सेवाओं, स्व-प्रमाणन, ऑनलाइन अनुमोदन और समयबद्ध सेवा वितरण प्रणाली को और मजबूत करें। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि एक ही जानकारी बार-बार विभिन्न स्तरों पर न मांगी जाए, ताकि व्यवस्था सरल और पारदर्शी बन सके।

