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Indian Rupee Weak: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले धराशायी हुआ रुपया, जानिए गिरावट की बड़ी वजह

Indian Rupee Weak: भारतीय करेंसी पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया सात पैसे टूटकर 88.77 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

Indian Rupee Weak: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले धराशायी हुआ रुपया, जानिए गिरावट की बड़ी वजह
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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Indian Rupee Weak: भारतीय करेंसी पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया सात पैसे टूटकर 88.77 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें घरेलू मुद्रा को कमजोर करने में मुख्य कारण बनी हैं।


अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Interbank Forex Market) में रुपया 88.73 प्रति डॉलर पर खुला, लेकिन कारोबार शुरू होते ही यह 88.77 तक फिसल गया। यह पिछले कारोबारी दिन के 88.70 प्रति डॉलर के मुकाबले सात पैसे की गिरावट दर्शाता है। इस बीच, डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाता है, 0.04% गिरकर 99.59 पर आ गया।


विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली का असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। बीएसई सेंसेक्स 258.83 अंक (0.31%) गिरकर 83,679.88 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी-50 47.95 अंक (0.19%) की गिरावट के साथ 25,674.15 अंक पर कारोबार कर रहा था। शुक्रवार को FII ने 6,769.34 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की थी, जिससे लगातार पूंजी बहिर्गमन ने रुपया और शेयर बाजार दोनों पर दबाव बढ़ा दिया।


अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.31% बढ़कर 64.97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल की बढ़ती कीमतें भारत के आयात बिल को प्रभावित करती हैं, जिससे व्यापार घाटा बढ़ता है और रुपया कमजोर होता है। अनुमान है कि अगर वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि जारी रहती है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकी नहीं, तो रुपया और गिर सकता है।


विश्लेषकों के अनुसार, रुपये की कमजोरी का कारण केवल अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें या डॉलर का मजबूती नहीं है। विदेशी निवेशकों की बहिर्गमन, घरेलू आर्थिक आंकड़े, मौद्रिक नीतियों की उम्मीदें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं भी इस दबाव में शामिल हैं। वहीं, सरकार और रिज़र्व बैंक की निगरानी और संभावित हस्तक्षेप से कुछ हद तक स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। इस बीच, निवेशकों को सुझाव दिया जा रहा है कि वे विदेशी मुद्रा बाजार और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सतर्क रहें और लंबे समय तक निवेश के दृष्टिकोण से निर्णय लें।