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लोन लेने वालों को बड़ा झटका! इस बड़े बैंक ने बढ़ाई ब्याज दरें, होम-कार और पर्सनल लोन की EMI हो सकती है महंगी

Bank MCLR hike: देश के प्रमुख निजी बैंक HDFC Bank ने MCLR (Marginal Cost of Funds Based Lending Rate) में 10 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी कर दी है, जो 8 जून 2026 से लागू हो गई है। इस बदलाव का सीधा असर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों

लोन लेने वालों को बड़ा झटका! इस बड़े बैंक ने बढ़ाई ब्याज दरें, होम-कार और पर्सनल लोन की EMI हो सकती है महंगी
Ramakant kumar
4 मिनट

Bank MCLR hike: देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक HDFC Bank ने अपने करोड़ों ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 10 बेसिस प्वाइंट (0.10%) तक की बढ़ोतरी कर दी है। नई ब्याज दरें 8 जून 2026 से लागू हो चुकी हैं। इस फैसले का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिनके होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन MCLR से जुड़े हुए हैं। ऐसे ग्राहकों की मासिक EMI बढ़ सकती है या फिर उनके लोन की अवधि लंबी हो सकती है।


बैंक के इस फैसले ने लाखों परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर उन लोगों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है जो हाल ही में लोन ले चुके हैं या आने वाले दिनों में घर, गाड़ी या अन्य जरूरतों के लिए कर्ज लेने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, जिन ग्राहकों के लोन RBI के रेपो रेट या अन्य बाहरी बेंचमार्क से जुड़े हुए हैं, उन पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर नहीं पड़ेगा।


किन दरों में हुई बढ़ोतरी?

HDFC Bank ने अलग-अलग अवधि की MCLR दरों में बदलाव किया है। छोटी अवधि के लोन पर 5 बेसिस प्वाइंट और कुछ अवधियों पर 10 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी की गई है।

  •  ओवरनाइट MCLR: 8.05% से बढ़कर 8.10%
  •  3 महीने की MCLR: 8.15% से बढ़कर 8.20%
  •  6 महीने की MCLR: 8.30% से बढ़कर 8.35%
  •  1 साल की MCLR: 8.35% से बढ़कर 8.40%
  •  2 साल की MCLR: 8.45% से बढ़कर 8.55%
  •  3 साल की MCLR: 8.60% से बढ़कर 8.65%


वहीं, 1 महीने की MCLR दर को 8.05% पर ही बरकरार रखा गया है।


आखिर क्या होता है MCLR?

MCLR यानी Marginal Cost of Funds Based Lending Rate वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जिसके नीचे बैंक सामान्य परिस्थितियों में लोन नहीं दे सकते। देश में बड़ी संख्या में पुराने होम लोन, ऑटो लोन और अन्य रिटेल लोन इसी व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। जब बैंक MCLR बढ़ाता है तो लोन की ब्याज दर भी बढ़ जाती है, जिससे ग्राहकों की EMI पर असर पड़ता है।


RBI ने रेपो रेट नहीं बढ़ाया, फिर भी क्यों महंगा हुआ लोन?

हाल ही में Reserve Bank of India ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था। इसके बावजूद बैंक अपनी फंडिंग लागत, जमा पर दिए जाने वाले ब्याज और बाजार में नकदी की स्थिति को देखते हुए MCLR में बदलाव करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकों पर जमा जुटाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बैंकों को फिक्स्ड डिपॉजिट और बचत योजनाओं पर अधिक ब्याज देना पड़ रहा है। इसी बढ़ी हुई लागत का असर अब लोन की ब्याज दरों पर भी दिखाई देने लगा है।


पहले राहत, अब बढ़ी चिंता

दिलचस्प बात यह है कि इसी साल मार्च में HDFC Bank ने MCLR में 10 बेसिस प्वाइंट तक की कटौती की थी। जनवरी और अप्रैल में भी चुनिंदा अवधियों की दरों में कमी की गई थी, जिससे कर्जदारों को राहत मिली थी। लेकिन अब बैंक के ताजा फैसले ने एक बार फिर EMI बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है।


अगर आपका होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन MCLR से लिंक है, तो आपको अपनी बैंक स्टेटमेंट और लोन रीसेट डेट पर नजर रखनी चाहिए। आने वाले महीनों में आपकी EMI बढ़ सकती है या फिर बैंक लोन की अवधि बढ़ाकर अतिरिक्त ब्याज वसूल सकता है। ऐसे में वित्तीय योजना बनाते समय अतिरिक्त खर्च का ध्यान रखना जरूरी होगा।