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Fertilizer Subsidy: किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध, सरकार देगी 37,216 करोड़ रुपये की सब्सिडी

Fertilizer Subsidy: सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए 37,216 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी मंजूर की, जिससे खाद की कीमतें नियंत्रित रहेंगी और कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
© Google
Nitish Kumar
Nitish Kumar
3 मिनट

Fertilizer Subsidy: सरकार द्वारा 37,216 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी देने का फैसला किया गया है, जिससे किसानों को महंगे खादों की कीमतों से राहत मिलेगी। यह निर्णय कृषि क्षेत्र की स्थिरता और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सस्ती दरों पर उर्वरक मिलने से किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।


केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 तक फॉस्फेट और पोटाश (P&K) आधारित उर्वरकों पर 37,216 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने की मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। इस फैसले का उद्देश्य खाद की कीमतों को नियंत्रित करना और किसानों को उचित दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराना है।

सरकार करेगी खाद की कीमतों को नियंत्रित

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा करते हुए बताया कि पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना के तहत उर्वरकों पर सब्सिडी की दरें तय कर दी गई हैं। इस योजना के तहत DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और अन्य प्रमुख उर्वरक किसानों को कम कीमतों पर मिलेंगे, जिससे वे अपनी खेती की लागत को कम कर सकेंगे।

खरीफ सत्र 2025 के लिए उर्वरक सब्सिडी दरें

सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों को ध्यान में रखते हुए P&K उर्वरकों पर सब्सिडी की राशि तय कर रही है। इससे किसानों को किफायती दरों पर खाद मिलेगा और कृषि उत्पादन में सुधार होगा। सरकार 28 ग्रेड के P&K उर्वरकों पर सब्सिडी प्रदान करेगी, ताकि उर्वरक कंपनियां किसानों को उचित कीमतों पर खाद उपलब्ध करा सकें।

एनबीएस योजना के तहत किसानों को मिलेगा फायदा

पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) योजना, जो अप्रैल 2010 से लागू है, के तहत निर्माताओं और आयातकों को सब्सिडी दी जाती है। इसका उद्देश्य किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराना है।

किसानों को उर्वरक सब्सिडी से क्या लाभ होगा?

DAP और अन्य उर्वरकों की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी।

कृषि उत्पादन की लागत घटेगी, जिससे किसानों को राहत मिलेगी।

अंतरराष्ट्रीय खाद कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर किसानों पर नहीं पड़ेगा।

खरीफ सत्र में फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार होगा।

आपको बता दे कि ,यह फैसला सरकार द्वारा किसानों को आर्थिक मजबूती देने और कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन देने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है | 

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