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ED Action: अनिल अंबानी के खिलाफ ED की बड़ी कार्रवाई, रिलायंस ग्रुप की 3,084 करोड़ से अधिक की संपत्तियां अटैच

ED Action: ED ने अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की 3,084 करोड़ से अधिक की संपत्तियों को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अटैच किया है। कार्रवाई में मुंबई के पाली हिल स्थित घर सहित 40 से अधिक संपत्तियां शामिल हैं।

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Mukesh Srivastava
3 मिनट

ED Action: प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने उद्योगपति अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप से जुड़ी संपत्तियों पर बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 3,084 करोड़ से अधिक की संपत्तियों को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत 31 अक्टूबर 2025 को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है।


ईडी की सूची में मुंबई के बांद्रा स्थित पाली हिल वाला आलीशान घर और दिल्ली का प्रमुख रिलायंस सेंटर शामिल हैं। इसके अलावा, दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई, कांचीपुरम और ईस्ट गोदावरी जैसे शहरों में स्थित कई जमीनें, दफ्तर और फ्लैट भी अटैच किए गए हैं। कुल मिलाकर, रिलायंस ग्रुप की 40 से अधिक संपत्तियों पर यह कार्रवाई की गई है।


ईडी की जांच का केंद्र रिलायंस ग्रुप की दो वित्तीय कंपनियाँ— Reliance Home Finance Ltd (RHFL) और Reliance Comercial Finance Ltd (RCFL) हैं। जांच के अनुसार, इन कंपनियों पर आम जनता और बैंकों से लिए गए धन के दुरुपयोग का आरोप है। यह मामला 2017 से 2019 के बीच का है, जब Yes Bank ने RHFL में 2,965 करोड़ और RCFL में 2,045 करोड़ का निवेश किया था। बाद में ये निवेश डूब गए, जिससे कंपनियों पर हज़ारों करोड़ रुपये की बकाया राशि रह गई।


जांच में यह भी सामने आया कि SEBI के नियमों का उल्लंघन करते हुए, म्यूचुअल फंड के ज़रिए जुटाए गए जनता के पैसे को अप्रत्यक्ष रूप से रिलायंस ग्रुप की अपनी कंपनियों में लगाया गया। फंड को घुमाकर यस बैंक के रास्ते इन कंपनियों में निवेश किया गया। ईडी का कहना है कि यह पूरा फंड डायवर्जन एक सुनियोजित योजना के तहत किया गया था।


इसके साथ ही, रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े एक अन्य मामले में भी ईडी ने अपनी जांच तेज़ कर दी है। इस केस में ग्रुप की कंपनियों पर 13,600 करोड़ से अधिक की राशि के दुरुपयोग का आरोप है। एजेंसी का कहना है कि इन कंपनियों ने फर्जी तरीके से लोन को चालू दिखाया और रकम को आपस में ट्रांसफर किया। ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई पब्लिक फंड की रिकवरी में अहम भूमिका निभाएगी, क्योंकि यह पैसा जनता और वित्तीय संस्थाओं का है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता