Bihar News: बिहार के लिए जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राज्य की पहली रिवर लिंक (नदी जोड़) परियोजना पूरी तरह तैयार हो गई है। बागमती नदी को बूढ़ी गंडक से जोड़ने के लिए बनाई गई बेलवाधार लिंक चैनल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। रविवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन किया। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से बाढ़ और सिंचाई दोनों समस्याओं का स्थायी समाधान मिलेगा तथा करीब 8.5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचेगा।
तीन साल में पूरा हुआ निर्माण कार्य
जल संसाधन विभाग के अनुसार, शिवहर जिले के बेलवा से मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर तक लगभग 68.80 किलोमीटर लंबी बेलवाधार लिंक चैनल का निर्माण किया गया है। इस परियोजना पर करीब 130.88 करोड़ रुपये की लागत आई है। सभी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद वर्ष 2023 में निर्माण कार्य शुरू किया गया था, जिसे अब सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह परियोजना बिहार में नदी जल के बेहतर उपयोग और वैज्ञानिक जल प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
बागमती का अतिरिक्त पानी पहुंचेगा बूढ़ी गंडक में
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान बागमती नदी में अक्सर जलस्तर काफी बढ़ जाता है, जबकि बूढ़ी गंडक में अपेक्षाकृत कम पानी रहता है। इसी असंतुलन को दूर करने के लिए दोनों नदियों को लिंक चैनल के माध्यम से जोड़ा गया है।परियोजना के तहत बागमती नदी से अतिरिक्त पानी को बेलवाधार चैनल के जरिए बूढ़ी गंडक तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए आधुनिक हेड रेगुलेटर का निर्माण किया गया है, जिसमें छह गेट लगाए गए हैं। इन गेटों के माध्यम से जरूरत के अनुसार पानी का प्रवाह नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे न केवल बाढ़ का दबाव कम होगा बल्कि सिंचाई के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा।
तीन जिलों को बाढ़ से राहत, चार जिलों को सिंचाई का लाभ
सरकार के अनुसार इस परियोजना से मुजफ्फरपुर, शिवहर और सीतामढ़ी के कई इलाकों में बाढ़ की समस्या कम होने की उम्मीद है। वहीं शिवहर, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी मिलेगा।खेती पर निर्भर हजारों किसानों के लिए यह परियोजना काफी लाभकारी साबित हो सकती है। पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिलने से कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी सुधार की संभावना जताई जा रही है।
भू-जल स्तर में भी दिखने लगा सकारात्मक असर
जल संसाधन विभाग का कहना है कि परियोजना के निर्माण के दौरान ही चैनल क्षेत्र में पानी का संचयन शुरू हो गया था। इसके कारण आसपास के इलाकों में भू-जल स्तर में सुधार देखने को मिला है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष संबंधित क्षेत्रों में भू-गर्भ जल स्तर बेहतर दर्ज किया गया है। आने वाले वर्षों में इसका सकारात्मक प्रभाव और अधिक दिखाई देगा, जिससे पेयजल और कृषि दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक कदम
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस परियोजना को बिहार के जल संसाधनों के समेकित और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि बागमती–बूढ़ी गंडक रिवर लिंक योजना के तहत बेलवा (शिवहर) से मीनापुर (मुजफ्फरपुर) तक बने बेलवाधार लिंक चैनल का उद्घाटन राज्य के विकास की नई शुरुआत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से सिंचाई क्षमता में वृद्धि होगी, बाढ़ नियंत्रण को मजबूती मिलेगी और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समेकित जल संसाधन प्रबंधन के विजन को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम भी बताया।
बिहार के लिए क्यों है खास?
बेलवाधार लिंक चैनल केवल एक नहर परियोजना नहीं, बल्कि बिहार में जल प्रबंधन की नई सोच का प्रतीक है। यह परियोजना एक ओर बाढ़ के अतिरिक्त पानी का वैज्ञानिक उपयोग करेगी, वहीं दूसरी ओर पानी की कमी वाले क्षेत्रों तक जल पहुंचाकर खेती और भू-जल संरक्षण को मजबूत बनाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में राज्य की अन्य नदियों को जोड़ने की दिशा में भी इसी तरह की योजनाओं को गति मिल सकती है। इससे बिहार में जल सुरक्षा, कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।





