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"100 में नहीं होगा, 200 दो..." जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर ‘रेट फिक्स’ का आरोप, PHC का वीडियो वायरल

Bihar Viral Video: पूर्वी चंपारण के तुरकौलिया PHC से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें जन्म प्रमाण पत्र बनाने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगाया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और भ्रष्टाचार को...

"100 में नहीं होगा, 200 दो..." जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर ‘रेट फिक्स’ का आरोप, PHC का वीडियो वायरल
Ramakant kumar
3 मिनट

Bihar Viral Video: बिहार में सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे पूर्वी चंपारण जिले के तुरकौलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का बताया जा रहा है. वीडियो में दावा किया जा रहा है कि जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के बदले एक स्वास्थ्यकर्मी खुलेआम पैसे की मांग कर रहा है. वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं.


वायरल वीडियो में एक व्यक्ति जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 100 रुपये देता है. इस पर सामने बैठा स्वास्थ्यकर्मी यह कहते हुए सुनाई देता है कि, “100 में नहीं होगा, 200 रुपये लगेगा.” इसके बाद कथित तौर पर 200 रुपये लेने के बाद ही जन्म प्रमाण पत्र दिया जाता है. इसी बातचीत का वीडियो अब सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तेजी से शेयर किया जा रहा है.


वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं. सोशल मीडिया पर यूजर्स का कहना है कि सरकारी कार्यालयों और अस्पतालों में कई काम बिना पैसे दिए नहीं होते और अलग-अलग कामों के लिए अलग-अलग “रेट” तय हैं. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.


फिर भी इस कथित वीडियो के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं. यदि जांच में वीडियो सही पाया जाता है और रिश्वत लेने के आरोप साबित होते हैं, तो यह सरकारी सेवा में भ्रष्टाचार का गंभीर मामला माना जाएगा.

गौरतलब है कि इन दिनों बिहार में रिश्वतखोरी से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. कभी कोई ब्लॉक कर्मी रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाता है तो कभी अंचल स्तर के अधिकारी निगरानी विभाग की कार्रवाई में रंगे हाथों गिरफ्तार होते हैं. हाल ही में एक सीओ को भी रिश्वत लेते हुए निगरानी विभाग की टीम ने पकड़ा था.


ऐसे में सबसे बड़ा सवाल सरकार से है कि आखिर भ्रष्टाचार की इन बढ़ती घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं? क्या दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लग सके?


आज हालात यह हैं कि स्वास्थ्य विभाग से लेकर जमीन-जायदाद से जुड़े कार्यालयों और कई अन्य सरकारी दफ्तरों तक, आम जनता को अपने काम के लिए रिश्वत की मांग का सामना करना पड़ रहा है. कई बार पैसे नहीं देने पर लोगों के जरूरी काम महीनों तक लंबित रख दिए जाते हैं. ऐसे में आम जनता आखिर जाए तो जाए कहां?


अब सवाल सरकार से है कि भ्रष्टाचार के इस बढ़ते जाल को खत्म करने के लिए क्या प्रभावी व्यवस्था बनाई जा रही है? क्या आम लोगों को बिना रिश्वत के सरकारी सेवाएं दिलाने के लिए कोई ठोस पहल होगी?