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फर्स्ट बिहार की खबर का बड़ा असर: 60 दिन में टूटी सड़क और पुलिया की हुई मरम्मत

पूर्वी चंपारण में मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत बनी सड़क और पुलिया के क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। ग्रामीण कार्य विभाग के अनुसार ठेकेदार द्वारा सड़क और पुलिया की मरम्मत करा दी गई है।

बिहार न्यूज
FIRST BIHAR पर 7 जून को चली थी खबर
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

EAST CHAMPARAN: पूर्वी चंपारण जिले में मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत बनाई गई नई सड़क और पुलिया के महज 60 दिनों के भीतर टूटने और धंसने की खबर फर्स्ट बिहार ने 07 जून को प्रसारित की थी। बताया था कि कैसे सड़क के बीचों-बीच दरारें पड़ी हुई है और पुलिया का एक हिस्सा भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। हाल ऐसा है कि अब इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को हादसे का डर सताने लगा है। फर्स्ट बिहार पर खबर चलने के बाद इस मामले पर तुरंत संज्ञान लिया गया।


क्षतिग्रस्त पथ की मरम्मति का काम ठेकेदार के द्वारा कराया गया। अब जर्जर सड़क को ठीक कर लिया गया है। इस बात की जानकारी ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता, पकड़ीदयाल ई. इफ्तखार अहमद ने दी है। इस संबंध में उन्होंने ग्रामीण कार्य विभाग के एम.एम.जी.एस.वाई. कोषांग के नोडल पदाधिकारी को चिट्टी लिखकर इसकी जानकारी दी है। 


उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर जिस पुलिया के बारे में खबर चलाई जा रही है। उस पुलिया का निर्माण पूर्व में पंचायत स्तर से किया गया था। जिसमें हेवी लोडेड वाहनों की आवागमन के कारण उक्त पुलिया परामपेट सहित क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसके वजह से उक्त स्थल पर निर्मित पीसीसी पथ भी क्षतिग्रस्त हो गया था। सूचना मिलते ही उक्त क्षतिग्रस्त पुलिय और पथ का मरम्मति कार्य संवेदक द्वारा करा दिया गया है। जिस सड़क और पुलिया की मरम्मति की गयी है उसका दो फोटोग्राफ्स भी संलग्न किया गया है। 


दरअसल यह मामला परसौनी से बोकाने को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग की है। जहां शिव मंदिर से रामपुर मनोरथ तक करीब 1.8 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कराया गया था। सड़क बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब आने-जाने में सुविधा होगी, लेकिन कुछ ही दिनों में सड़क और पुलिया की हालत खराब होने लगी। ग्रामीणों का आरोप था कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती गई है। उनका कहना था कि सड़क और पुलिया बनाने में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी वजह से इतनी जल्दी निर्माण कार्य जवाब दे गया। 


लोगों का कहना था कि अगर काम सही तरीके से हुआ होता तो सड़क और पुलिया दो महीने में इस हालत में नहीं पहुंचती। ग्रामीणों का यह भी आरोप था कि निर्माण स्थल पर लगाए गए सरकारी बोर्ड में योजना की लागत की जानकारी तक नहीं दी गई है। इसे लेकर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे थे। लोगों का कहना था कि जब सरकारी पैसे से काम हुआ है तो खर्च की पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए थी। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और संबंधित विभाग के अधिकारियों से पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। 



फर्स्ट बिहार की खबर का बड़ा असर: 60 दिन में टूटी सड़क और पुलिया की हुई मरम्मत

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पूर्वी चम्पारण सोहराब आलम की रिपोर्ट

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