Bihar News : पूर्वी चंपारण जिले में अप्रैल 2026 में हुई जहरीली शराब कांड में उत्पाद पुलिस की भूमिका पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना रही है. उप आयुक्त की रिपोर्ट के बाद मोतिहारी उत्पाद थाने के थानाध्यक्ष समेत थाने के 7 कर्मियों को सस्पेंड किया गया है. वहीं छापेमारी टीम के सात सदस्यों को भी निलंबित कर दिया गया है. एक साथ 14 उत्पाद अफसरों के निलंबन के बाद हड़कंप मच गया है.
सहायक उत्पाद आयुक्त के खिलाफ भी एक्शन होगा ?
सवाल यही है कि क्या शराब के खेल में सिर्फ उत्पाद थाने के इंस्पेक्टर-दारोगा शामिल हैं या जिला उत्पाद का मुखिया यानि सहायक आयुक्त भी जिम्मेदार हैं ? जिले में शराब की रोकथाम करने में उत्पाद पुलिस विफल रही, तब जिला के प्रमुख उत्पाद अधिकारी (सहायक आयुक्त) पर क्या कार्रवाई हो रही ? यह सवाल तैर रहा है. सचिवालय के सूत्र बताते हैं कि मोतिहारी जहरीली शराब कांड, जिसमें 10 लोगों की मौत हुई है, इस मामले में मोतिहारी के सहायक आयुक्त से स्पष्टीकरण की मांग की गई है. शो-कॉज के जवाब की समीक्षा की जायेगी. मद्य निषेध विभाग अगर जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ तो विभागीय कार्यवाही चलाई जायेगी.
बता दें, मोतिहारी के रघुनाथपुर और तुरकौलिया इलाके में अप्रैल महीने में जहरीली शराब पीने से हुई 10 लोगों की मौत के मामले में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने 14 मद्यनिषेध पुलिस पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है। विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश में तीन निरीक्षक, चार अवर निरीक्षक और सात सहायक अवर निरीक्षकों पर कार्रवाई की गई है।
निलंबित अधिकारियों में मोतिहारी सदर के उत्पाद निरीक्षक मनीष सर्राफ, चलिष्णु दल के मद्यनिषेध निरीक्षक मो. सेराज और सिकरहना सह सदर के मद्यनिषेध निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार शामिल हैं। इसके अलावा मद्यनिषेध अवर निरीक्षक उदय कुमार, मुकेश कुमार, नागेश कुमार और धर्मेंद्र झा को भी निलंबित किया गया है।
वहीं सहायक अवर निरीक्षक स्तर के जिन अधिकारियों पर गाज गिरी है उनमें अजय कुमार, धर्मेंद्र कुमार सिंह, रोशनी कुमारी, बसंत कुमार महतो, कबिन्द्र कुमार, रंजीत कुमार और शशि ऋषि के नाम शामिल हैं। विभागीय आदेश के अनुसार निलंबन अवधि के दौरान इन सभी का मुख्यालय ग्रुप सेंटर मद्यनिषेध भागलपुर निर्धारित किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, मोतिहारी जहरीली शराब कांड के बाद विभाग की ओर से पूरे मामले की जांच कराई गई थी। दरभंगा प्रमंडल के मद्यनिषेध उपायुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। जांच में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं, जिसके बाद विभाग ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि अधिकारियों द्वारा दिए गए जवाब को संतोषजनक नहीं माना गया और अंततः विभाग ने निलंबन की कार्रवाई कर दी।
जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जनवरी से मार्च 2026 के बीच मोतिहारी मद्यनिषेध थाना क्षेत्र में स्पिरिट से जुड़ा एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया था। इतना ही नहीं, सदर और मोतिहारी चलिष्णु दल की ओर से भी अवैध शराब कारोबार के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई थी। इससे यह स्पष्ट हुआ कि इलाके में अवैध शराब नेटवर्क के खिलाफ आसूचना संकलन और निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर थी।
स्थलीय जांच के दौरान यह भी पाया गया कि अवैध शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने में संबंधित अधिकारियों ने अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई। विभाग ने माना कि समय रहते सख्त कार्रवाई की जाती तो जहरीली शराब से हुई मौतों जैसी घटना को रोका जा सकता था।
गौरतलब है कि अप्रैल महीने में मोतिहारी के रघुनाथपुर और तुरकौलिया क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर कानून व्यवस्था और शराबबंदी कानून को लेकर सवाल खड़े किए थे। वहीं सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए थे।
अब 14 अधिकारियों के निलंबन के बाद यह साफ संकेत दिया गया है कि शराबबंदी कानून को लागू करने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। विभाग की इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।





