1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Sat, 24 Jan 2026 01:38:12 PM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google
Bihar Bhumi: बिहार में सरकारी जमीन के सबसे बड़े दुश्मन अधिकारी ही हैं. अधिकारियों और भू माफियाओं की वजह से सरकारी जमीन का बंदरबांट किया जा रहा है. इस पर नकेल कसने की सरकार के तमाम दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं. पूर्वी चंपारण में करोड़ों की सरकारी जमीन पर बड़ा खेल हुआ है. यह खेल किसी दूसरे ने नहीं बल्कि सरकार के अधिकारियों ने किया है. जांच रिपोर्ट में भारी खेल कर सीओ से लेकर डीसीएलआर ने “बकास्त वृत्तदार बाजार” किस्म की जमीन को निजी (रैयती) भूमि साबित करने की कोशिश की. हालांकि एक अधिकारी की रिपोर्ट ने पूरे खेल को उजागर कर दिया, और साजिश में शामिल दो अंचल अधिकारी और भूमि सुधार उप समाहर्ता बेनकाब हो गए.
करोड़ों की जमीन की जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खेल
पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) में सरकारी अधिकारियों ने बड़ा खेल किया. अरेराज के तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता और तत्कालीन दो अंचल अधिकारियों की टीम ने हरसिद्धी बाजार की “बकास्त वृत्तदार बाजार” किस्म की विवादित लगभग 1 एकड़ 98 डिसमिल जमीन पर से सरकार की स्थिति कमजोर कर दी. इतना ही नहीं इस रिपोर्ट के आधार पर 2020 से चल रहे अतिक्रमणवाद को खत्म करा दिया. हालांकि सरकार के दूसरे वरीय अधिकारी ने करोड़ों की बेशकीमती जमीन मामले में जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंप दी. जिससे पूरे मामले से पर्दा उठ गया और खेल में शामिल अधिकारी बेपर्द हो गए.
खेल में शामिल अधिकारी हो गए बेपर्द
पूर्वी चंपारण जिले के संबंधित अनुमंडल के SDO ने वर्ष 2024 में हरसिद्धी की विवादित जमीन का जांच प्रतिवेदन जिलाधिकारी को समर्पित किया . एसडीओ ने उक्त विवादित भूखंडों की जांच हल्का कर्मचारी एवं अंचल अमीन से कराई. हल्का कर्मचारी एवं अंचल अमीन की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन अंचलाधिकारी हरसिद्धि ने सभी दखल कब्जा करने वालों को नोटिस जारी किया था. इसके बाद दखलकारों द्वारा भूमि से संबंधित उपलब्ध कराए गए साक्ष्य पर तत्कालीन अंचल अधिकारी ने 2021 में पूर्वी चंपारण के अपर समाहर्ता से मार्गदर्शन मांगा था. एडीएम से मार्गदर्शन मांगा गया था कि उक्त भूमि को रैयती माना जाए या नहीं ? इसके बाद वर्ष 2022 में भी तत्कालीन अंचल अधिकारी ने अपर समाहर्ता से उक्त भूमि के रैयती होने या ना होने के संबंध में स्पष्ट मार्गदर्शन मांगा. इस आलोक में अपर समाहर्ता ने मई 2022 में ही भूमि सुधार उपसमहर्ता अरेराज, अंचलाधिकारी हरसिद्धी और अरेराज की त्रिस्तरीय जांच समिति गठित की थी .
DCLR-CO की रिपोर्ट पर करोड़ों की विवादित जमीन से अतिक्रमणवाद को किया गया था ड्रॉप
2024 में जिलाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन भूमि सुधार उपसमाहर्ता ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया था कि अंचल अधिकारी हरसिद्धि एवं अरेराज के संयुक्त जांच प्रतिवेदन के आलोक में उक्त खाता- खेसरा की भूमि पर अतिक्रमणवाद चलाना उचित नहीं है . भूमि सुधार उप समाहर्ता की यह रिपोर्ट अंचलाधिकारी हरसिद्धि को नहीं भेजने की वजह से हरसिद्धी अंचल अधिकारी ने 2024 में ही अपर समाहर्ता से मार्गदर्शन मांगा . अपर समाहर्ता ने जुलाई 2024 में अंचलाधिकारी हरसिद्धि को भूमि सुधार उप समाहर्ता के पत्र का उल्लेख करते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा. इसके बाद अंचल अधिकारी ने जुलाई 2024 में ही उक्त भूमि जो “बकास्त वृत्तदार बाजार” किस्म की है, उस पर चल रहे अतिक्रमणवाद को ड्रॉप कर दिया .
DM को भेजी गई रिपोर्ट- उक्त भूमि का किस्म ''बकास्त वृतदार बाजार''
वर्ष 2024 में पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी को भेजी गई रिपोर्ट में संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी और भूमि सुधार उपसमाहर्ता की तरफ से कहा गया है कि हरसिद्धि में अवस्थित उक्त विवादित 'खाता-खेसरा' की भूमि को सार्वजनिक भूमि से 'इतर' भूमि घोषित करने का अनुरोध किया गया है. उपलब्ध कराए गए अभिलेखों के आधार पर उक्त भूमि के सार्वजनिक भूमि नहीं होने या रैयती भूमि होने के संबंध में स्पष्ट निष्कर्ष निकालना संभव प्रतीत नहीं है. ऐसा इसलिए क्यों कि उक्त भूमि का किस्म ''बकास्त वृतदार बाजार'' है। साथ ही इस भूमि पर विभिन्न व्यक्ति के नाम से जमाबंदी कायम है.
सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने को खूब हुआ था आंदोलन
जिनके कंधों पर सरकारी जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने की जिम्मेदारी है, वे नहीं चाहते कि जमीन की वापसी हो.जमीन निजी हाथों में ही रहे, इसके लिए तरह-तरह के खेल किए जा रहे हैं. उक्त जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराने को लेकर काफी आंदोलन हुए. मामला कोर्ट में भी गया. खेल को उजागर करने में मुख्य भूमिका निभाने वाले एक शख्स की हत्या भी हो गई. पिता की हत्या में शामिल अपराधियों को सजा दिलाने और अतिक्रमित सरकारी जमीन से कब्जा हटाने को लेकर शख्स के पुत्र ने आत्मदाह कर लिया. इस तरह से इस मामले में दो लोगों की जान चली चली गई, पर विवाद जस का तस कायम है. हद तो तब हो गई जब अधिकारियों ने उक्त विवादित जमीन का प्रकार बदलकर कब्जाधारी के पक्ष में काम किया.
खबर की अगली कड़ी में बतायेंगे कि तत्कालीन अंचल अधिकारियों और डीसीएलआर की रिपोर्ट क्या कहती है. बतायेंगे कि कैसे जमीन का प्रकार बदलकर फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई.