Bihar News : बिहार में CBSE के नाम पर चल रहा फर्जीवाड़ा, पटना के दो स्कूलों पर FIR ; जानिए क्या है मामला

बिहार में कई निजी स्कूल बिना मान्यता के CBSE के नाम पर छात्रों को गुमराह कर रहे हैं। पटना के दो स्कूलों पर FIR की सिफारिश के बाद पूरे राज्य में ऐसे मामलों की जांच तेज हो सकती है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 13, 2026, 8:37:51 AM

Bihar News : बिहार में CBSE के नाम पर चल रहा फर्जीवाड़ा, पटना के दो स्कूलों पर FIR ; जानिए क्या है मामला

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Bihar News : बिहार में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नाम का दुरुपयोग कर स्कूल चलाने का मामला अब खुलकर सामने आने लगा है। हाल ही में पटना के दो निजी स्कूलों पर सीबीएसई के नाम का अवैध उपयोग कर अभिभावकों और छात्रों को गुमराह करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की गई है। शिकायत के अनुसार सेंट पॉल्स इंटरनेशनल स्कूल, साधनापुरी और सेंट पॉल्स इंटरनेशनल हाई स्कूल सीबीएसई के नाम का अवैध उपयोग कर रहा है। बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की शिकायत के बाद यह कार्रवाई शुरू हुई है। बताया जा रहा है कि यह सिर्फ एक शुरुआत है और जांच आगे बढ़ने पर राज्य के कई जिलों में ऐसे मामलों का खुलासा हो सकता है।


दरअसल बिहार के लगभग सभी जिलों में कुछ निजी स्कूल सीबीएसई के नाम का सहारा लेकर अभिभावकों को भ्रमित कर रहे हैं। कई स्कूल बिना किसी आधिकारिक मान्यता के ही अपने संस्थान को सीबीएसई से संबद्ध बताकर छात्रों का नामांकन कर लेते हैं। स्कूलों के बाहर लगे बोर्ड और विज्ञापनों में बड़े अक्षरों में “CBSE Affiliated” लिखा होता है, जबकि छोटे अक्षरों में “To Be” जोड़ दिया जाता है। इससे अभिभावकों को यह भ्रम हो जाता है कि विद्यालय को सीबीएसई की मान्यता मिल चुकी है, जबकि वास्तविकता में ऐसा नहीं होता।


शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कई ऐसे स्कूल वर्षों से इसी तरीके से संचालन कर रहे हैं। इन संस्थानों में कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई भी कराई जाती है, जबकि बोर्ड से मान्यता नहीं होने के कारण वे सीधे तौर पर सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में छात्रों का पंजीकरण नहीं करा सकते। ऐसे में ये स्कूल छात्रों का रजिस्ट्रेशन किसी दूसरे सीबीएसई से संबद्ध विद्यालय के माध्यम से करवाते हैं। इसके बाद छात्र उसी स्कूल के नाम से बोर्ड परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन पढ़ाई अवैध रूप से किसी और संस्थान में कराई जाती है।


शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से न केवल नियमों का उल्लंघन होता है, बल्कि छात्रों का भविष्य भी जोखिम में पड़ सकता है। यदि किसी समय जांच में अनियमितता सामने आती है तो छात्रों की पढ़ाई और परीक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसके बावजूद कई स्कूल संचालक अभिभावकों की जानकारी की कमी का फायदा उठाकर इस तरह का खेल लंबे समय से चला रहे हैं।


जानकारी के मुताबिक, समय-समय पर ऐसे स्कूलों की जांच भी की जाती है। कई बार शिकायत मिलने पर शिक्षा विभाग या बोर्ड की टीम निरीक्षण करती है, लेकिन अधिकांश मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। विभागीय स्तर पर ढिलाई या प्रक्रिया की जटिलता के कारण ऐसे स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती, जिसका फायदा शिक्षा के धंधेबाज उठाते रहते हैं। यही कारण है कि यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।


हालांकि इस बार पटना में सामने आए मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश को एक सख्त कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी संभावना जताई जा रही है कि राज्यभर में ऐसे मामलों की जांच तेज की जा सकती है।


इस पूरे मामले के बीच अभिभावकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का नामांकन किसी भी स्कूल में कराने से पहले उसकी मान्यता की जांच अवश्य कर लेनी चाहिए। इसके लिए सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संबंधित विद्यालय की संबद्धता (Affiliation) की जानकारी आसानी से देखी जा सकती है।


यदि किसी स्कूल का नाम सीबीएसई की सूची में नहीं है, तो समझ लेना चाहिए कि वह विद्यालय बोर्ड से संबद्ध नहीं है। ऐसे में वहां बच्चों का नामांकन कराने से पहले पूरी जानकारी लेना बेहद जरूरी है। जागरूकता और सही जानकारी ही अभिभावकों को इस तरह के भ्रम और धोखाधड़ी से बचा सकती है।