Vijendra Yadav : बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है, जहां जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता विजेंद्र यादव को उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। लंबे समय से सक्रिय राजनीति में बने रहे विजेंद्र यादव को जेडीयू कोटे से डिप्टी सीएम बनाया जाना उनके अनुभव, संगठन के प्रति निष्ठा और राजनीतिक कौशल का प्रमाण माना जा रहा है।
विजेंद्र यादव ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत साल 1990 में की थी, जो बिहार की राजनीति में बदलाव का दौर था। उस समय जनता दल के उभार के साथ उन्होंने सुपौल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए कोसी इलाके के मजबूत नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई।
उनकी सियासी यात्रा में एक अहम मोड़ तब आया जब वे लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाने लगे। लालू प्रसाद यादव ने उनकी मेहनत और ईमानदार छवि को देखते हुए 1991 में उन्हें राज्य मंत्री बनाया। बाद में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिला। 1995 में जब लालू यादव ने दोबारा सत्ता हासिल की, तब विजेंद्र यादव को नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान उनके कामकाज को काफी सराहना मिली और उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर खुद को मजबूत किया।
साल 1997 में जनता दल में बड़ा विभाजन हुआ, जब लालू प्रसाद यादव और शरद यादव के बीच अलग-अलग गुट बन गए। इस राजनीतिक संकट के समय विजेंद्र यादव ने शरद यादव का साथ चुना, जिसके चलते उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर होना पड़ा। हालांकि, बाद में जब नीतीश कुमार और शरद यादव एक साथ आए और जेडीयू का गठन हुआ, तब विजेंद्र यादव भी इस पार्टी में शामिल हो गए।
साल 2000 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जेडीयू के टिकट पर जीत हासिल की और अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया। इसके बाद 2005 में वे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बने और बिहार में जेडीयू को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसी वर्ष बनी सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
विजेंद्र यादव की खासियत यह रही है कि 2005 के बाद से लेकर अब तक बिहार में जितनी भी सरकारें बनीं, लगभग सभी में वे मंत्री के तौर पर शामिल रहे। उन्होंने सिंचाई, ऊर्जा, विधि, संसदीय कार्य, मद्य निषेध और निबंधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा संभाला। बाद में उन्हें वित्त मंत्री की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, जहां उन्होंने राज्य की आर्थिक नीतियों को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।
साल 2015 में बिहार की राजनीति में उथल-पुथल के दौरान उन्हें मंत्री पद से हटना पड़ा, लेकिन उनकी वापसी ज्यादा लंबी नहीं रही। 2017 में जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनी, तब वे फिर मंत्री बनाए गए और अपनी भूमिका निभाते रहे। 2024 में जेडीयू के दोबारा एनडीए में शामिल होने के बाद बनी सरकार में भी वे प्रमुख चेहरों में शामिल रहे।
लगातार तीन दशक से अधिक लंबे राजनीतिक अनुभव के चलते विजेंद्र यादव को एक भरोसेमंद और अनुभवी नेता के रूप में देखा जाता है। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनकी पकड़ मजबूत रही है। यही वजह है कि 2025 में एक बार फिर जब बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन हुआ, तो उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजेंद्र यादव का डिप्टी सीएम बनना न सिर्फ जेडीयू के लिए बल्कि पूरे एनडीए गठबंधन के लिए एक संतुलनकारी कदम है। कोसी क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और प्रशासनिक अनुभव सरकार के कामकाज को मजबूती देगा।
इस तरह विजेंद्र यादव की यह नई जिम्मेदारी उनके राजनीतिक जीवन का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो उनके लंबे संघर्ष, अनुभव और पार्टी के प्रति समर्पण को दर्शाता है। आने वाले समय में उनसे राज्य के विकास और सुशासन को लेकर बड़ी अपेक्षाएं जुड़ी होंगी।






