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बिहार के खजाने में सेंध!..इस्तीफा देने के बाद भी शिक्षक को मिलती रही सैलरी, कटिहार में बड़ा खुलासा

कटिहार जिले के कदवा प्रखंड में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। शिक्षक मनोज दिवाकर के इस्तीफा देने के बावजूद सितंबर और अक्टूबर का वेतन उनके खाते में भेज दिया गया। मामला उजागर होने के बाद विभाग ने राशि की रिकवरी का आदेश जारी किया है।

बिहार न्यूज
कटिहार में शिक्षा विभाग का बड़ा कारनामा
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

KATIHAR: बिहार के कटिहार जिले से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कदवा प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय मुसहरी टोला सागरथ में कार्यरत एक शिक्षक ने नौकरी से इस्तीफा देने के बाद भी दो माह तक वेतन प्राप्त किया। मामला उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और संबंधित राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


जानकारी के अनुसार, शिक्षक मनोज दिवाकर ने 28 अगस्त 2025 को विभाग को पंजीकृत डाक (रजिस्टर्ड पोस्ट) के माध्यम से अपना त्यागपत्र भेज दिया था। नियमानुसार त्यागपत्र स्वीकार होने के बाद उनका वेतन भुगतान रोक दिया जाना चाहिए था। इसके बावजूद उनके बैंक खाते में सितंबर और अक्टूबर महीने का वेतन भेज दिया गया।


मामले के सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षक ने अगस्त में ही इस्तीफा दे दिया था और विद्यालय में उपस्थित नहीं थे, तो उनकी उपस्थिति विवरणी किसने तैयार की? आखिर किस अधिकारी या कर्मी की अनुमति से वेतन भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई?


इस मामले को सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि बिना कार्य किए सरकारी वेतन का भुगतान कैसे हो गया।


कटिहार जिला शिक्षक प्राधिकारी राहुल चंद चौधरी ने बताया कि संबंधित शिक्षक द्वारा पूर्व में त्यागपत्र दिया जा चुका था। इसके बावजूद उपस्थिति विवरणी के आधार पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) कार्यालय द्वारा वेतन का भुगतान कर दिया गया। मामला संज्ञान में आने के बाद नियमानुसार भुगतान की गई राशि की रिकवरी के लिए पत्र जारी कर दिया गया है।


उन्होंने बताया कि संबंधित शिक्षक को निर्देश दिया गया है कि वे प्राप्त वेतन राशि को निर्धारित चालान के माध्यम से सरकारी खाते में जमा करें और उसकी प्रति कार्यालय में उपलब्ध कराएं। विभाग पूरे मामले की जांच में जुटी है। यह पता लगाया जा रहा है कि वेतन भुगतान में लापरवाही या अनियमितता के लिए कौन जिम्मेदार है? अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है या नहीं? वही सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई कैसे सुनिश्चित की जाती है।

कटिहार से सोनू कुमार की रिपोर्ट