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पटना में स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती पर समारोह का आयोजन, मंत्री रामकृपाल यादव समेत बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

Patna News: पटना में स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती पर स्मारक परिसर में समारोह आयोजित किया गया। मंत्री रामकृपाल यादव, पूर्व मंत्री डॉ. अनिल कुमार और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

Bihar News
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Patna News: किसान आंदोलन के युगद्रष्टा, शोषित–वंचित समाज की संगठित चेतना के शिल्पकार और सामाजिक न्याय के निर्भीक प्रहरी स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती 15 फरवरी 2026 (रविवार) को पटना में वैचारिक गंभीरता, श्रद्धा और संघर्ष की भावना के साथ मनाई गई।


यह आयोजन स्वामी सहजानंद सरस्वती स्मारक समिति, पटना के तत्वावधान में विद्यापति मार्ग स्थित स्वामी सहजानंद सरस्वती स्मारक परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एक महापुरुष को श्रद्धांजलि अर्पित करना नहीं, बल्कि उनके विचारों को आज की सामाजिक–राजनीतिक परिस्थितियों में पुनः जीवित करना था।


कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मंत्री डॉ. अनिल कुमार ने की, जबकि मंच संचालन श्याम सुन्दर शरण, मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से०) द्वारा किया गया। डॉ अनिल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती केवल एक संत या समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि वे भारतीय किसान चेतना के वैचारिक स्तंभ थे। उन्होंने ज़मींदारी व्यवस्था, सामंती शोषण और सामाजिक असमानता के विरुद्ध संगठित संघर्ष को वैचारिक दिशा दी। उनका पूरा जीवन इस बात का प्रमाण है कि सामाजिक परिवर्तन बिना संघर्ष के संभव नहीं होता।


बिहार सरकार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने अपने विचार रखते हुए कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती के सिद्धांत आज के दौर में और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं, जब किसान, खेतिहर मज़दूर और ग्रामीण समाज आर्थिक व सामाजिक दबावों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि सहजानंद जी ने किसानों को केवल अधिकारों की बात नहीं सिखाई, बल्कि आत्मसम्मान और संगठन की ताकत से परिचित कराया।


श्याम सुन्दर शरण ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती का विचार लोकतंत्र की उस आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ सत्ता नहीं बल्कि समाज का अंतिम व्यक्ति केंद्र में होता है। उन्होंने चेताया कि यदि आज की पीढ़ी सहजानंद जी के विचारों से कटती चली गई, तो सामाजिक न्याय केवल नारा बनकर रह जाएगा।


कार्यक्रम में किसानों, मज़दूरों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह संकल्प लिया कि वे स्वामी सहजानंद सरस्वती की वैचारिक विरासत को केवल स्मृति तक सीमित नहीं रहने देंगे, बल्कि उसे संगठन, संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन के व्यवहारिक आंदोलन में रूपांतरित करेंगे। समारोह का समापन इस सामूहिक प्रण के साथ हुआ कि सामाजिक न्याय, किसान अधिकार और मानवीय गरिमा की लड़ाई को हर परिस्थिति में आगे बढ़ाया जाएगा, क्योंकि यही स्वामी सहजानंद सरस्वती को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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