Bihar Workers : ETP टैंक में उतरते ही दम घुटने से बिहार के तीन मजदूरों की मौत, एक की हालत गंभीर

गुजरात के सूरत में कपड़ा रंगाई मिल के ETP टैंक में उतरने के दौरान दम घुटने से बिहार के तीन मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक की हालत गंभीर है। पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मामले की जांच कर रहे हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 07, 2026, 2:29:14 PM

Bihar Workers : ETP टैंक में उतरते ही दम घुटने से बिहार के तीन मजदूरों की मौत, एक की हालत गंभीर

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Bihar Workers : गुजरात के सूरत शहर से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां कपड़ा रंगाई मिल में काम करने वाले बिहार के तीन मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई। यह घटना सूरत के पांडेसरा इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक फैक्ट्री में हुई, जहां अपशिष्ट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) के अंडरग्राउंड टैंक की सफाई के दौरान चार मजदूर टैंक में उतर गए थे। जहरीली गैस के कारण वे सभी बेहोश हो गए, जिसमें से तीन की मौत हो गई, जबकि एक मजदूर की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।


पुलिस ने शनिवार को इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि हादसा गुरुवार रात पांडेसरा इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित पारस प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड नाम की कपड़ा रंगाई मिल में हुआ। हालांकि, फैक्ट्री प्रबंधन ने इस घटना की सूचना पुलिस को शुक्रवार को दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।


पांडेसरा थाने के इंस्पेक्टर जेआर चौधरी के अनुसार, फैक्ट्री के अपशिष्ट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) के अंडरग्राउंड टैंक की सफाई के लिए चार मजदूरों को अंदर भेजा गया था। जैसे ही मजदूर टैंक के भीतर पहुंचे, वहां मौजूद जहरीली गैस के कारण वे कुछ ही देर में बेहोश हो गए। टैंक के अंदर ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस होने के कारण उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई।


फैक्ट्री के अन्य कर्मचारियों ने जब उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, तब तक काफी देर हो चुकी थी। सभी को आनन-फानन में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद तीन मजदूरों को मृत घोषित कर दिया। वहीं चौथे मजदूर की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज अस्पताल में जारी है।


मृतकों की पहचान 23 वर्षीय सोनू पासवान, 19 वर्षीय दिलीप पासवान और 23 वर्षीय संदीप पासवान के रूप में हुई है। वहीं चौथे मजदूर महेंद्र पासवान की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, चारों मजदूर मूल रूप से बिहार के रहने वाले थे और रोजी-रोटी की तलाश में सूरत में काम कर रहे थे।


इस घटना के बाद फैक्ट्री परिसर में हड़कंप मच गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया है और मृतकों के परिजनों को इस घटना की सूचना दे दी गई है। जैसे ही यह खबर बिहार में उनके गांव पहुंची, परिवारों में मातम छा गया।


पुलिस का कहना है कि इस मामले में फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या मजदूरों को टैंक में उतरने से पहले जरूरी सुरक्षा उपकरण और गैस जांच की व्यवस्था की गई थी या नहीं। अगर लापरवाही पाई जाती है तो फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


इधर, गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) और फॉरेंसिक विभाग के अधिकारियों ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि टैंक के अंदर किस तरह की गैस मौजूद थी और किन परिस्थितियों में मजदूरों की मौत हुई।


प्रारंभिक आशंका यही जताई जा रही है कि टैंक में मौजूद जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण मजदूरों का दम घुट गया, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। हालांकि मौत के सही कारणों का पता पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।


यह घटना एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अक्सर देखा जाता है कि फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाते, जिसके कारण इस तरह के हादसे हो जाते हैं। फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हुई हैं।