1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 25 Feb 2026 12:22:14 PM IST
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Bihar News : बिहार विधान परिषद में जदयू के सदस्य नीरज कुमार ने पटना के नए और पुराने डीएम ऑफिस की महत्त्व को लेकर सवाल उठाया। नीरज कुमार ने कहा कि पटना का पुराना डीएम ऑफिस डच शैली में निर्मित एक ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे संरक्षित करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। यह भवन न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है, बल्कि स्थापत्य कला और ऐतिहासिक विरासत के लिहाज से भी इसकी अलग पहचान है। ऐसे में इसे संरक्षित रखना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी बनती है। जबकि नया भवन आधुनिक शैली से बना है और इसमें सुरक्षा का अधिक ध्यान दिया गया है इसलिए इसका निर्माण हुआ है।लेकिन इसके बाद भी यह कहते हैं कि इसमें पैसा खर्च नहीं करना चाहिए या नया जो डीएम ऑफिस बना है वह नहीं बनाना चाहिए।
नीरज कुमार ने कहा कि सरकार ने पुराने भवन को संरक्षित रखते हुए नया डीएम कार्यालय भी तैयार कराया है, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस और भूकंपरोधी तकनीक पर आधारित है। बिहार भूकंप के दृष्टिकोण से संवेदनशील क्षेत्र में आता है, इसलिए प्रशासनिक भवनों का सुरक्षित और आपदा-रोधी होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नया डीएम कार्यालय न सिर्फ तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों को अधिक सुगम और प्रभावी बनाने में भी सहायक साबित हो रहा है।
मंत्री की ओर से सदन में इस विषय पर विस्तार से जवाब दिया गया। सरकार ने बताया कि पुराने भवन की ऐतिहासिक पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए उसका संरक्षण किया जाएगा, वहीं नए भवन के माध्यम से आधुनिक प्रशासनिक आवश्यकताओं को पूरा किया जा रहा है। यह विकास और विरासत—दोनों के संतुलन का उदाहरण है।
सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि हाल ही में हुई राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में पटना डीएम कार्यालय को देश में नंबर वन रैंकिंग मिली है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि बिहार की राजधानी के लिए गर्व का विषय भी है। इससे यह साबित होता है कि सरकार द्वारा किए गए निवेश और सुधार के प्रयास सफल रहे हैं।
विपक्ष द्वारा इसे पैसे की बर्बादी करार देने पर नीरज कुमार ने कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने कहा कि जो लोग विकास कार्यों को केवल राजनीतिक नजरिए से देखते हैं, वे राज्य की प्रगति को समझ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि विपक्ष को लगता है कि यह फिजूलखर्ची है, तो वे डीएम कार्यालय न जाएं। साथ ही सभापति महोदय से आग्रह किया कि एक बोर्ड लगवाया जाए, जिसमें ऐसे लोगों के नाम अंकित किए जाएं जो इसे धन की बर्बादी बताते हैं, और उनका प्रवेश निषेध किया जाए।
हालांकि यह बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में आया, लेकिन इससे यह स्पष्ट है कि सरकार इस परियोजना को अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है। विरासत संरक्षण और आधुनिक विकास के बीच संतुलन बनाना किसी भी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। पटना डीएम कार्यालय का उदाहरण इस बात को दर्शाता है कि यदि सही योजना और दृष्टिकोण हो, तो इतिहास और आधुनिकता साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।