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पटना एयरपोर्ट पर “बिहार एम्पोरियम” की शुरुआत, अब सफ़र के साथ संस्कृति का संग

पटना एयरपोर्ट पर “बिहार एम्पोरियम” की शुरुआत, जहां मधुबनी, टिकुली, मंजूषा और सिक्की शिल्प जैसी कलाओं का प्रदर्शन होगा। यात्रियों को संस्कृति का अनुभव और शिल्पकारों को मिलेगा वैश्विक बाजार।

बिहार
संस्कृति के साथ विकास की उड़ान
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर अब केवल गांवों और प्रदर्शनियों तक सीमित नहीं रहेगी। अब राजधानी के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कदम रखते ही यात्रियों का स्वागत राज्य की परंपरा, कला और इतिहास से होगा। एयरपोर्ट परिसर में “बिहार एम्पोरियम” की शुरुआत के साथ ही मधुबनी पेंटिंग, टिकुली आर्ट, मंजूषा कला, सिक्की शिल्प और सिरेमिक कलाकृतियों जैसी पारंपरिक कलाओं को एक नया मंच मिला है।


यह एम्पोरियम केवल एक बिक्री केंद्र नहीं, बल्कि बिहार की सैकड़ों साल पुरानी विरासत और उसके कारीगरों की मेहनत का जीवंत दस्तावेज़ है। यहां आने वाले देश-विदेश के यात्री न सिर्फ़ इन कलाओं को करीब से देख सकेंगे, बल्कि उन्हें खरीदकर घर भी ले जा सकेंगे। इससे न केवल कला को नई पहचान मिलेगी, बल्कि उन शिल्पकारों के जीवन में भी बदलाव आएगा, जो पीढ़ियों से इस धरोहर को संजोए हुए हैं।


परंपरा और प्रगति का संगम

उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने बिहार एम्पोरियम को राज्य की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। एम्पोरियम में मधुबनी और टिकुली पेंटिंग के अलावा सिक्की घास से बनी कलाकृतियाँ, पत्थर और लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी, मंजूषा और सिरेमिक जैसे शिल्प भी प्रदर्शित और बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। इससे पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक बाजारों से जोड़ने का रास्ता खुलेगा। यह पहल सिर्फ़ सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने और शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। इस एम्पोरियम से कारीगरों को वैश्विक बाजार से जुड़ने और अपने उत्पादों को बड़े स्तर पर बेचने का अवसर मिलेगा।


संस्कृति के साथ विकास की उड़ान

पटना एयरपोर्ट पर खुला यह एम्पोरियम बिहार की नई पहचान बनने जा रहा है, जहाँ यात्रियों को राज्य की समृद्ध कला और परंपरा का अनुभव होगा और स्थानीय शिल्पकारों को अपने हुनर को विश्व तक पहुंचाने का मौका। यह केवल एक एम्पोरियम नहीं, बल्कि उस नई सोच की शुरुआत है जिसमें संस्कृति और विकास एक साथ कदमताल करते हैं।

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