Bihar Governor : बिहार के नए राज्यपाल बने सैयद अता हसनैन, जानिए सैन्य अधिकारी से लेकर गवर्नर बनने तक का सफर

केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। जानिए उनका सैन्य करियर, शिक्षा, सम्मान और अब तक का पूरा प्रोफाइल।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 05, 2026, 11:23:43 PM

Bihar Governor : बिहार के नए राज्यपाल बने  सैयद अता हसनैन, जानिए सैन्य अधिकारी से लेकर गवर्नर बनने तक का सफर

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Bihar Governor : केंद्र सरकार ने भारतीय सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) Syed Ata Hasnain को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया है। लंबे और प्रतिष्ठित सैन्य करियर के लिए पहचाने जाने वाले अता हसनैन भारतीय सेना में रणनीतिक नेतृत्व, काउंटर-इंसर्जेंसी अभियानों और कश्मीर घाटी में अपनी भूमिका के लिए खास पहचान रखते हैं। उनके पास करीब चार दशकों का सैन्य अनुभव है और सेवानिवृत्ति के बाद भी वे राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक मामलों और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं।


शिक्षा और प्रारंभिक जीवन

सैयद अता हसनैन का प्रारंभिक जीवन शिक्षा और अनुशासन के माहौल में बीता। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा नैनीताल स्थित प्रतिष्ठित Sherwood College से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए University of Delhi से अध्ययन किया। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में भी प्रशिक्षण और अध्ययन किया। इनमें लंदन का Royal College of Defence Studies और अमेरिका के हवाई स्थित Asia-Pacific Center for Security Studies शामिल हैं। इन संस्थानों में प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने रक्षा नीति, सामरिक अध्ययन और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञता हासिल की।


सैन्य करियर

अता हसनैन का सैन्य करियर बेहद गौरवशाली रहा है। उन्हें वर्ष 1974 में देहरादून स्थित Indian Military Academy से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद भारतीय सेना की प्रतिष्ठित रेजिमेंट Garhwal Rifles की चौथी बटालियन में कमीशन मिला। करीब 40 वर्षों के अपने सैन्य जीवन में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। जम्मू-कश्मीर में उनकी भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। उन्होंने श्रीनगर में भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण फील्ड फॉर्मेशन में से एक XV Corps (Chinar Corps) की कमान संभाली, जो कश्मीर घाटी में सेना के अभियानों की निगरानी करता है।

इसके अलावा उन्होंने XXI Corps का नेतृत्व भी किया और सेना मुख्यालय में मिलिट्री सेक्रेटरी जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी कार्य किया। अपने करियर के दौरान उन्होंने आतंकवाद-रोधी अभियानों, सीमा सुरक्षा और सामरिक योजना से जुड़े कई अहम फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2013 में वे भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए।


सैन्य सम्मान

भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवा के लिए अता हसनैन को कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मानों से सम्मानित किया गया है। इनमें Param Vishisht Seva Medal, Uttam Yudh Seva Medal, Ati Vishisht Seva Medal और Sena Medal शामिल हैं। ये सम्मान उनके साहस, नेतृत्व क्षमता और उत्कृष्ट सेवा को दर्शाते हैं।


सेवानिवृत्ति के बाद की भूमिका

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी अता हसनैन सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बने रहे। वर्ष 2018 में उन्हें Central University of Kashmir का चांसलर नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा को मजबूत करने, शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने और विश्वविद्यालय प्रशासन में सुधार के लिए कई पहल की। इसके अलावा वे राष्ट्रीय सुरक्षा, कश्मीर नीति और भू-राजनीतिक मुद्दों पर एक प्रमुख विश्लेषक और वक्ता के रूप में भी जाने जाते हैं। विभिन्न मंचों और सेमिनारों में वे सुरक्षा और रणनीति से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखते रहे हैं।


नई संवैधानिक जिम्मेदारी

अब बिहार के राज्यपाल के रूप में सैयद अता हसनैन एक नई संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। राज्यपाल का पद राज्य की संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और इसमें प्रशासनिक संतुलन, लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा और सरकार व राज्य के बीच समन्वय की अहम भूमिका होती है। उनकी नियुक्ति के साथ वे उन पूर्व सैन्य अधिकारियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने सेना में उत्कृष्ट सेवा देने के बाद देश में संवैधानिक पदों पर जिम्मेदारी संभाली है। माना जा रहा है कि उनके प्रशासनिक अनुभव, अनुशासन और रणनीतिक सोच का लाभ बिहार को भी मिलेगा। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में उनकी नियुक्ति को एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है और अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि वे अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता के आधार पर राज्यपाल के रूप में किस तरह अपनी भूमिका निभाते हैं।