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Panchayat Chunav 2026 : पंचायत चुनाव से पहले सरकार का बड़ा एक्शन! इन मुखिया-सचिव पर गिरेगी गाज, इस तरह की एजेंसी भी होगी ब्लैकलिस्ट

बिहार में पंचायत चुनाव 2026 से पहले सरकार ने पंचायतों में विकास कार्यों को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। 1% से कम राशि खर्च करने वाली पंचायतों में मुखिया और सचिव पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं, घटिया निर्माण करने वाली एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट करने की भी तैयारी

Panchayat Chunav 2026
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Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

Panchayat Chunav 2026 : बिहार में अगले पंचायत चुनाव से पहले राज्य सरकार ने पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों को लेकर बड़ा सख्त रुख अपनाया है। पंचायती राज विभाग ने साफ कर दिया है कि अब सरकारी योजनाओं में सुस्ती, अनियमितता या गुणवत्ता से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। पंचायतों में विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग होगी और गड़बड़ी मिलने पर सीधे जिम्मेदार अधिकारियों, पंचायत सचिवों और मुखिया तक पर कार्रवाई की जाएगी।


सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं और ग्रामीण विकास योजनाओं को समय पर पूरा कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विभाग का मानना है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने से गांवों के लोगों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिलेगा।


1 प्रतिशत से कम खर्च पर तय होगी जवाबदेही

पंचायती राज विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि जिन पंचायतों में विकास योजनाओं की राशि का एक प्रतिशत से भी कम खर्च हुआ है, वहां विशेष जांच कराई जाए। ऐसे मामलों में यह देखा जाएगा कि काम क्यों नहीं हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।


यदि लापरवाही या जानबूझकर कार्य में देरी की पुष्टि होती है, तो संबंधित मुखिया, पंचायत सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास योजनाओं के लिए जारी धन समय पर खर्च हो और उसका लाभ ग्रामीणों तक पहुंचे।


टेंडर नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्ती

सरकार ने 15 लाख रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। यदि इतनी राशि वाली किसी योजना का कार्य बिना निर्धारित टेंडर प्रक्रिया के कराया गया या सरकारी नियमों का उल्लंघन किया गया, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।


इसके अलावा पंचायत भवनों के निर्माण और मरम्मत कार्यों में देरी करने वाली एजेंसियों को भी अब राहत नहीं मिलेगी। समय सीमा का पालन नहीं करने पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। वहीं, निर्माण कार्य की गुणवत्ता खराब मिलने पर संबंधित एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने तक की कार्रवाई की जाएगी।


अच्छी पंचायतों को मिलेगा इनाम

सरकार ने केवल सख्ती का रास्ता ही नहीं चुना है, बल्कि बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को प्रोत्साहित करने का भी फैसला लिया है। जो पंचायतें विकास योजनाओं को समय पर पूरा करेंगी, कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखेंगी और गुणवत्ता मानकों का पालन करेंगी, उन्हें भविष्य में नई योजनाओं और अतिरिक्त विकास कार्यों में प्राथमिकता दी जाएगी। इससे पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ने की उम्मीद है।


हर जिले में होगी लगातार निगरानी

पंचायती राज विभाग ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पंचायतों में चल रही योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, खर्च की स्थिति और समय सीमा की निगरानी लगातार होगी। यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता, घटिया निर्माण या सरकारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी सामने आती है, तो तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विभाग का कहना है कि अब पंचायत स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त होगी।


पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी

इसी बीच बिहार सरकार ने पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में राज्य कैबिनेट ने ग्राम पंचायत कर, दर एवं शुल्क नियमावली-2026 को मंजूरी दी है। इस नियमावली के लागू होने के बाद गांवों में भी होल्डिंग टैक्स की व्यवस्था लागू होगी। इसके तहत पक्के मकानों के साथ-साथ सिनेमा हॉल, होटल, हाट-बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान, मंदिर और अन्य संस्थानों से निर्धारित दरों के अनुसार कर और शुल्क वसूला जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे पंचायतों की अपनी आय बढ़ेगी और वे विकास कार्यों के लिए सरकारी अनुदान पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेंगी।


चुनाव से पहले सरकार का स्पष्ट संदेश

पंचायत चुनाव से पहले सरकार का यह रुख साफ संकेत देता है कि अब ग्रामीण विकास योजनाओं में लापरवाही करने वालों के लिए कोई जगह नहीं होगी। एक ओर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है, तो दूसरी ओर बेहतर काम करने वाली पंचायतों को प्रोत्साहन देकर विकास की रफ्तार बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। आने वाले महीनों में पंचायतों के कामकाज पर सरकार की निगरानी और अधिक तेज होने की संभावना है।