ब्रेकिंग
अब कीपैड फोन से भी बिना नेट के भेज सकेंगे पैसे, बिना इंटरनेट होगा UPI पेमेंट!टिश्यू पेपर पर ‘BOMB’ लिखा मिला, एअर इंडिया की फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंगस्वाइन फ्लू के बीच अब चूहा बुखार का खतरा, 2 महीने में 130 से ज्यादा केस मिलेBihar News: घूसखोर DCLR कंचन कुमारी झा के खिलाफ स्पीडी ट्रायल ! 7 साल तक की हो सकती है सजा, विवाद के बीच विजिलेंस ब्यूरो ने शिकायतकर्ता को पटना बुलाया...26 साल पुराना सोन नदी जल विवाद खत्म, बिहार-झारखंड के बीच बनी सहमतिअब कीपैड फोन से भी बिना नेट के भेज सकेंगे पैसे, बिना इंटरनेट होगा UPI पेमेंट!टिश्यू पेपर पर ‘BOMB’ लिखा मिला, एअर इंडिया की फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंगस्वाइन फ्लू के बीच अब चूहा बुखार का खतरा, 2 महीने में 130 से ज्यादा केस मिलेBihar News: घूसखोर DCLR कंचन कुमारी झा के खिलाफ स्पीडी ट्रायल ! 7 साल तक की हो सकती है सजा, विवाद के बीच विजिलेंस ब्यूरो ने शिकायतकर्ता को पटना बुलाया...26 साल पुराना सोन नदी जल विवाद खत्म, बिहार-झारखंड के बीच बनी सहमति

Bihar News: कौन हैं देवेश कुमार...क्यों दिया था MLC से इस्तीफा ? BJP नेतृत्व और सरकार की साख बचाने वाले नेता को मिला सम्मान...

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधान पार्षद देवेश कुमार को सम्राट सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी दी है। मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने के लिए अपनी MLC सीट छोड़ने वाले देवेश कुमार को अब बिहार राज्य योजना पर्षद का उपाध्यक्ष बनाया गया है।

देवेश कुमार, भाजपा विधान पार्षद, योजना पर्षद, Bihar Politics, Samrat Chaudhary, Samrat Government, Devesh Kumar, Devansh Kumar, Bihar State Planning Board, Bihar State Planning Council, Yojana Parisha
© Google
Viveka Nand
7 मिनट

Bihar News: बीजेपी ने पिछले महीने एक बड़ा फैसला लिया था. एक बड़े सियासी घटनाक्रम के बीच अपने विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार का इस्तीफा करा दिया था. एक महीने बाद सम्राट सरकार ने विधान परिषद सदस्य से इस्तीफा देने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेश कुमार को बिहार राज्य योजना पर्षद का उपध्यक्ष बनाया है.  देवेश कुमार ने अपनी एम.एल.सी. सीट छोडी ताकि मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जा सके। एनडीए सरकार के लिए मंत्री दीपक प्रकाश को सदन भेजना एक बड़ी चुनौती थी। तब देवेश कुमार ने गठबंधन और संगठन की मर्यादा को सर्वोपरी रखते हुए अपने पद से इस्तीफा देकर एक संकटमोचक की भूमिका निर्वहन किया था. 

देवेश कुमार ने क्यों दिया था MLC से इस्तीफा?

देवेश कुमार ने अपनी एम.एल.सी. सीट छोड़ी ताकि बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जा सके। वर्तमान में एनडीए सरकार के लिए मंत्री दीपक प्रकाश को सदन भेजना एक बड़ी चुनौती थी। इन्होंने गठबंधन धर्म और संगठन की मर्यादा को सर्वोपरि रखते हुए अपने पद से इस्तीफा देकर एक जिम्मेदार नेता का परिचय दिया। उन्होंने संकटमोचक की भूमिका निभाते हुए ऐसा निर्णय लिया, जिससे पार्टी और सरकार दोनों की साख एवं एकता सुरक्षित रह सके।

संविधान के अनुसार मंत्री को निर्धारित अवधि के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना होता है। इसलिए दीपक प्रकाश को परिषद में भेजना सरकार और एनडीए के लिए आवश्यक माना गया। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा था कि दीपक प्रकाश बिना विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने छह महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे बने रह सकते हैं ?भाजपा ने एक बार फिर गठबंधन धर्म निभाने का उदाहरण प्रस्तुत किया है। एनडीए की एकजुटता, सरकार की स्थिरता और सहयोगी दलों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया। यह कदम दर्शाता है कि भाजपा केवल गठबंधन की बात नहीं करती, बल्कि अपने सहयोगियों को उचित प्रतिनिधित्व देकर उसे व्यवहार में भी उतारती है।

बता दें, देवेश कुमार मार्च 2021 में राज्यपाल कोटे से मनोनीत एम.एल.सी. बने थे और उनका कार्यकाल 2027 तक था। इसके बावजूद उन्होंने इस्तीफा दिया, जिससे स्पष्ट हुआ कि यह सामान्य इस्तीफा नहीं, बल्कि राजनीतिक आवश्यकता के तहत लिया गया फैसला था।

कौन है देवेश कुमार ?

देवेश कुमार बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता, पत्रकार और बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य रहे हैं। ये भारतीय जनता पार्टी के सच्चे सिपाही, कुशल राजनेता एवं समर्पित संगठनकर्ता हैं। उन्होंने सदैव व्यक्तिगत हित से ऊपर संगठन और विचारधारा को प्राथमिकता दी है। ये स्वतंत्रता सेनानी एवं किसान नेता पंडित यमुना कार्यों के पोते हैं। इनकीप्रारंभिक शिक्षा पटना के प्रतिष्ठित संत माईकल्स हाई स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने संत जेवियर्स कॉलेज, रांची से अर्थशास्त्र में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली से समाज शास्त्र, एम.ए. एवं एम.फिल. किया। उत्कृष्ट शैक्षणिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ वे छात्र जीवन से ही वैचारिक, सामाजिक एवं सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं, जिसने उनके व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता को और अधिक समृद्ध किया।

जेएनयू छात्र संघ चुनाव में उन्होंने अध्यक्ष पद के लिए भी चुनाव लड़ा था, जहां उनका मुकाबला वामपंथी छात्र नेता चंद्रशेखर से हुआ था। चंद्रशेखर देश के चर्चित छात्र नेताओं में से एक थे, जिनकी बाद में सीवान में दुखद हत्या कर दी गई थी। यह चुनाव देवेश कुमार की प्रारंभिक राजनीतिक सक्रियता और नेतृत्व क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।देवेश कुमार ने लगभग दो दशकों तक सक्रिय पत्रकारिता की और देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस, द इकनॉमिक टाइम्स, इंडिया टुडे तथा एनडीटीवी जैसे अग्रणी संस्थानों में कार्य करते हुए राजनीति, शासन और जन सरोकार से जुड़े मुद्दों पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके व्यापक अनुभव और गहन समझ ने उन्हें सार्वजनिक जीवन एवं राजनीति में भी एक प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया।

भाजपा में शामिल होने के बाद देवेश कुमार प्रदेश प्रवक्ता, प्रदेश उपाध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री सहित कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। वर्तमान में वह मिजोरम राज्य के प्रभारी हैं तथा भाजपा केंद्रीय टीम के सदस्य हैं।

पंडित यमुना कार्यों की विरासत, जनसेवा का संकल्पः देवेश कुमार

किसान आंदोलन की गौरवशाली विरासत के उत्तराधिकारी देवेश कुमार जी भारतीय किसान आंदोलन के महान नेता एवं स्वतंत्रता सेनानी पंडित यमुना कार्यों जी के पौत्र हैं।पंडित यमुना कार्यों का ऐतिहासिक योगदानः पंडित यमुना कार्यों भारतीय किसान आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्होंने किसानों के अधिकारों की लड़ाई को संगठित स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वामी सहजानंद सरस्वती के करीबी सहयोगीः पंडित यमुना कार्यों किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती के सबसे विश्वसनीय सहयोगियों में गिने जाते थे। उन्हें स्वामी जी का "दाहिना हाथ माना जाता था।किसान आंदोलन के विस्तार में अहम भूमिकाः स्वामी सहजानंद सरस्वती को किसान आंदोलन का नेतृत्व संभालने के लिए प्रेरित करने और आंदोलन को व्यापक जनाधार दिलाने में पंडित यमुना कार्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

आत्मकथा में विशेष उल्लेखः स्वामी सहजानंद सरस्वती ने अपनी आत्मकथा में अनेक स्थानों पर पंडित यमुना कार्यों का उल्लेख किया है, जो दोनों नेताओं के बीच गहरे विश्वास और आत्मीय संबंध को दर्शाता है।

देवपार से जुड़ा ऐतिहासिक प्रसंगः स्वामी सहजानंद सरस्वती और पंडित यमुना कार्यों का संबंध इतना गहरा था कि स्वामी जी ने अपने जीवन के अंतिम दिन पंडित यमुना कार्यों के परिवार के साथ बिताए।

स्वामी सहजानंद सरस्वती और पंडित यमुना कार्यों का संबंध गहरे वैचारिक और व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित था। जीवन के अंतिम दिनों में स्वामी सहजानंद समस्तीपुर के देवपार गांव स्थित पंडित यमुना कार्यों के आवास पर स्वास्थ्य लाभ के लिए रहे थे। बाद में उन्होंने मुजफ्फरपुर के प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में स्वेच्छा से देह त्याग किया। इस कारण देवपार गांव भारतीय किसान आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक स्थान रखता है।

विचार, संघर्ष और जनसेवा की परंपरा देवेश कुमार उसी वैचारिक, सामाजिक और राष्ट्रवादी परंपरा के प्रतिनिधि हैं, जिसने किसानों, वंचितों और समाज के अंतिम व्यक्ति के अधिकारों के लिए संघर्ष को अपना जीवन समर्पित किया।

रिपोर्टिंग
V

रिपोर्टर

Viveka Nand

FirstBihar संवाददाता