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NSMCH में मरीज को मिली नई जिंदगी, चार साल पुराने कंधे के फ्रैक्चर का हुआ सफल ऑपरेशन

पटना के नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NSMCH) में चार साल पुराने जटिल कंधे के फ्रैक्चर से पीड़ित महिला मरीज का सफल ऑपरेशन किया गया। विशेषज्ञों ने शोल्डर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी के जरिए क्षतिग्रस्त हड्डी की जगह कृत्रिम इम्प्लांट लगाया।

Patna News
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Patna News: नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एनएसएमसीएच), पटना के अस्थि रोग विभाग ने चार वर्ष पुराने जटिल कंधे के फ्रैक्चर से पीड़ित एक महिला मरीज का सफल ऑपरेशन कर उन्हें राहत दिलाई है। खास बात यह रही कि आयुष्मान भारत योजना के तहत यह पूरा इलाज न्यूनतम खर्च पर संपन्न हुआ, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ा।



मरीज के बाएं कंधे की हड्डी का ऊपरी हिस्सा चार वर्ष पूर्व टूटकर अपनी जगह से खिसक गया था। लंबे समय तक उचित इलाज न मिलने के कारण कंधे की कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित हो चुकी थी। उन्हें हाथ उठाने, कपड़े पहनने और बाल बनाने जैसे रोजमर्रा के सामान्य काम करने में भी कठिनाई होती थी। आर्थिक तंगी के कारण वे समय पर ऑपरेशन नहीं करा सकी थीं।



एनएसएमसीएच पहुंचने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उनकी विस्तृत जांच एवं एक्स-रे मूल्यांकन किया। हड्डी की टूटी-खिसकी पुरानी स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञ टीम ने कंधे के प्रत्यारोपण (शोल्डर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी) का निर्णय लिया। आवश्यक जांच एवं सावधानियों के बाद ऑपरेशन किया गया, जिसमें कंधे की हड्डी के क्षतिग्रस्त ऊपरी गोल हिस्से को हटाकर उसकी जगह कृत्रिम इम्प्लांट लगाया गया।



ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर एवं संतोषजनक है। फिजियोथेरेपी और पुनर्वास शुरू कर दिया गया है तथा कंधे की गतिविधियों में क्रमिक सुधार देखा जा रहा है। लंबे समय से दैनिक कार्यों में कठिनाई झेल रही मरीज के लिए यह ऑपरेशन सामान्य जीवन की ओर लौटने की नई उम्मीद बना है।



इस सर्जरी में मुख्य भूमिका डॉ. रंजीत कुमार सिंह के कुशल मार्गदर्शन एवं सर्जिकल नेतृत्व तथा डॉ. अश्विनी गौरव की सर्जिकल दक्षता की रही। सहायक चिकित्सक टीम में डॉ. आनंद गुप्ता, डॉ. सन्नी सिंह, डॉ. अजिंक्य गौतम एवं डॉ. विशाल शामिल रहे।



अस्पताल प्रशासन के अनुसार एनएसएमसीएच में जटिल फ्रैक्चर, जोड़ प्रत्यारोपण एवं अन्य हड्डी रोग संबंधी ऑपरेशन के लिए आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं तथा ऑपरेशन के बाद मरीजों की नियमित निगरानी, फिजियोथेरेपी एवं पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से पात्र एवं जरूरतमंद मरीजों को न्यूनतम खर्च पर उच्च स्तरीय इलाज उपलब्ध कराने का कार्य लगातार जारी रहेगा, ताकि आर्थिक परिस्थितियों के कारण कोई भी मरीज आवश्यक इलाज से वंचित न रहे।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता