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Bihar Assembly Deputy Speaker : नरेंद्र नारायण यादव बने बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष, सर्वसम्मति से हुआ निर्विरोध चयन

बिहार विधानसभा में आज अहम फैसला हुआ, जब जेडीयू नेता और आलमनगर से आठ बार के विधायक नरेंद्र नारायण यादव को सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष चुन लिया गया। उनके निर्विरोध चयन से सदन में सकारात्मक माहौल बना।

Bihar Assembly Deputy Speaker : नरेंद्र नारायण यादव बने बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष, सर्वसम्मति से हुआ निर्विरोध चयन
Tejpratap
Tejpratap
3 मिनट

Bihar Assembly Deputy Speaker : बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान आज राजनीतिक हलचल का केंद्र उस समय बना, जब जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मधेपुरा के आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से आठवीं बार विजयी हुए विधायक नरेंद्र नारायण यादव को विधानसभा का उपाध्यक्ष चुन लिया गया। उनका चयन निर्विरोध हुआ, क्योंकि विपक्ष ने भी उनके नाम पर सहमति जताई। इससे एक ओर जहां सत्तापक्ष में उत्साह है, वहीं विपक्ष ने भी इसे संसदीय परंपरा के अनुरूप कदम बताया है।


बिहार विधान सभा में उपाध्यक्ष पद के लिए बुधवार की सुबह कार्यवाही शुरू होने के बाद चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई। सत्तापक्ष की ओर से नरेंद्र नारायण यादव का प्रस्ताव लाया गया, जिस पर किसी भी दल की तरफ से आपत्ति नहीं दर्शाई गई। इसके बाद अध्यक्ष ने उन्हें निर्विरोध उपाध्यक्ष घोषित कर दिया। सदन में इस फैसले का स्वागत मेज थपथपाकर किया गया।



नरेंद्र नारायण यादव मधेपुरा जिले के आलमनगर विधानसभा क्षेत्र से लगातार आठ बार चुनाव जीतकर सदन पहुंचे हैं। उनका राजनीतिक सफर बेहद सधा हुआ और अनुशासित माना जाता है। वे पहली बार 1995 में विधायक बने थे और तब से अपने क्षेत्र में विकास कार्यों और जमीन से जुड़े रहने के कारण उनकी लोकप्रियता बनी रही। उनकी छवि एक शांत, सरल और सभी दलों को साथ लेकर चलने वाले नेता की रही है।इन्हीं गुणों को देखते हुए जेडीयू नेतृत्व ने उन्हें उपाध्यक्ष पद के लिए आगे बढ़ाया। यह भी माना जा रहा है कि उनके चयन से सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सहयोग की नई राह खुलेगी क्योंकि यादव अपने व्यवहार और संतुलित राजनीति के लिए जाने जाते हैं।



बिहार विधानसभा में उपाध्यक्ष का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करना, विधायी प्रक्रियाओं पर नजर रखना, और सदस्यों के बीच संतुलन बनाए रखना उपाध्यक्ष का दायित्व होता है। वर्तमान सियासी परिस्थितियों में, जहां सदन में कई बार आरोप-प्रत्यारोप और शोरगुल के कारण कार्यवाही बाधित होती है, ऐसे में नरेंद्र नारायण यादव की भूमिका और भी अहम हो जाती है। उनसे यह उम्मीद की जा रही है कि वे अपने अनुभव और सरलता के बल पर सदन की कार्यवाही को अधिक अनुशासित और प्रभावी बनाएंगे।