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Magadh University : मगध विश्वविद्यालय में बड़ा एक्शन! प्रभारी कुलपति शशि प्रताप शाही हटाए गए, राजभवन ने जारी किया आदेश

मगध विश्वविद्यालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। प्रभारी कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही को हटाकर वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. दिलीप कुमार केसरी को कुलपति का प्रभार सौंपा गया है।

Magadh University : मगध विश्वविद्यालय में बड़ा एक्शन! प्रभारी कुलपति शशि प्रताप शाही हटाए गए, राजभवन ने जारी किया आदेश
Tejpratap
Tejpratap
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Magadh University : मगध विश्वविद्यालय में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए प्रभारी कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया है। इस संबंध में बिहार राजभवन की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है। राज्यपाल-सह-कुलाधिपति के निर्देश पर जारी आदेश में कहा गया है कि प्रो. शाही अब विश्वविद्यालय के किसी भी प्रशासनिक दायित्व का निर्वहन नहीं करेंगे। इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय परिसर से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।


राजभवन से जारी आदेश पर राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा के हस्ताक्षर हैं। अधिसूचना के मुताबिक विश्वविद्यालय में नई व्यवस्था लागू करते हुए वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. दिलीप कुमार केसरी को कुलपति का प्रभार सौंपा गया है। डॉ. केसरी फिलहाल विश्वविद्यालय के वरिष्ठतम शिक्षकों में शामिल हैं और अगले आदेश तक या नियमित कुलपति की नियुक्ति होने तक वे इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।


सूत्रों के अनुसार प्रो. शशि प्रताप शाही को हटाए जाने के पीछे पिछले कुछ दिनों से चल रहा विवाद अहम कारण माना जा रहा है। पूर्व भाजपा सांसद सुशील सिंह ने खुलकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने मगध विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और करोड़ों रुपये के गबन का गंभीर आरोप लगाया था। सुशील सिंह का दावा था कि विश्वविद्यालय में डेढ़ सौ करोड़ से लेकर दो सौ करोड़ रुपये तक की वित्तीय गड़बड़ी हुई है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनके आरोपों के बाद राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक हलचल लगातार बढ़ रही थी।


हालांकि राजभवन की ओर से जारी आदेश में हटाने के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन अचानक हुई इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा जगत में इस फैसले को विश्वविद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है। विश्वविद्यालय से जुड़े कई शिक्षकों और कर्मचारियों का मानना है कि पिछले कुछ समय से प्रशासनिक फैसलों और वित्तीय मामलों को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे थे।


नई जिम्मेदारी संभालने वाले डॉ. दिलीप कुमार केसरी को लेकर भी अधिसूचना में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि वे कुलपति के रूप में कार्य करते हुए बिना कुलाधिपति की पूर्व अनुमति के कोई नीतिगत फैसला नहीं लेंगे। साथ ही राजभवन द्वारा पहले जारी सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा। इससे साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन पर राजभवन की सीधी निगरानी बनी रहेगी।


बिहार राजभवन की इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच भी इस फैसले को लेकर चर्चा है। छात्रों का कहना है कि लंबे समय से विश्वविद्यालय में परीक्षा, रिजल्ट और प्रशासनिक कामकाज को लेकर शिकायतें मिलती रही हैं। ऐसे में नए नेतृत्व से व्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा रही है।


मगध विश्वविद्यालय बिहार के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है और इसके अंतर्गत बड़ी संख्या में कॉलेज संचालित होते हैं। ऐसे में कुलपति पद पर हुए इस अचानक बदलाव का असर विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राजभवन आगे विश्वविद्यालय में क्या बड़े फैसले लेता है और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच किस दिशा में बढ़ती है।