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Bihar News: बिहार में फिर बढ़ा लंपी वायरस का खतरा, टीकाकरण के बाद भी पशुओं में संक्रमण

Bihar News: बिहार में लंपी वायरस से ग्रस्त पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जबकि सरकार ने करीब दो महीने पहले ही बछड़ों और बाछियों का टीकाकरण कराया था। इसके बावजूद कई जिलों से संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं।

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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Bihar News: बिहार में लंपी वायरस से ग्रस्त पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जबकि सरकार ने करीब दो महीने पहले ही बछड़ों और बाछियों का टीकाकरण कराया था। इसके बावजूद कई जिलों से संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं, खासतौर पर कम उम्र की बाछियों में।


जमुई जिले के पशुपालक मनोज ने बताया कि उनकी एक साल की बछिया को समय पर लंपी का टीका दिया गया था, लेकिन फिर भी उसे 10-12 दिन पहले लंपी हो गया। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है और अब उसकी हालत ठीक है। इसी तरह, समस्तीपुर के पशुपालक राहुल को भी ऐसी ही परेशानी का सामना करना पड़ा।


इस बीमारी की शुरुआत तेज बुखार से होती है। पशु खाना-पीना छोड़ देता है और शरीर पर कठोर फोड़े या घाव बनने लगते हैं। कुछ दिनों बाद ये घाव फटने लगते हैं और पशु के पैरों में सूजन आ जाती है। यह एक वायरस से फैलने वाला संक्रामक रोग है, जो एक संक्रमित पशु से दूसरे स्वस्थ पशु में बहुत तेजी से फैलता है। बीमारी के फैलने की मुख्य वजह है गंदगी और संक्रमित पशुओं के संपर्क में आना। साफ-सफाई का ध्यान न रखने से संक्रमण तेजी से फैलता है।


इलाज और देखभाल के लिए संक्रमित पशु को तुरंत नजदीकी सरकारी पशु अस्पताल ले जाना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा नहीं देनी चाहिए। अगर हालत सामान्य हो, तो कुछ घरेलू उपाय किए जा सकते हैं, जैसे नीम के पत्तों को उबालकर ठंडा पानी बनाएं और उससे दिन में दो बार पशु के शरीर को साफ करें। 


पान के 10 पत्ते, काली मिर्च, नमक और गुड़ मिलाकर पेस्ट बनाएं और पहले दिन हर 3 घंटे में एक खुराक दें। फिर अगले 15 दिनों तक दिन में तीन बार दें। पशुपालकों को गौशाला में जाते समय और निकलते समय खुद को सैनिटाइज करना चाहिए, ताकि संक्रमण को रोका जा सके।

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