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Bihar land documents : जमीन के कागजात के लिए नहीं लगाने होंगे दफ्तरों के चक्कर, शुरू हुई यह सेवा; मंत्री ने खुद दी जानकारी

बिहार सरकार ने जमीन से जुड़े दस्तावेजों की सत्यापित नकल को ऑनलाइन कर आम लोगों को बड़ी राहत दी है। अब मोबाइल या कंप्यूटर से घर बैठे आवेदन कर 7 से 14 दिनों में कागजात प्राप्त किए जा सकेंगे।

Bihar land documents : जमीन के कागजात के लिए नहीं लगाने होंगे दफ्तरों के चक्कर, शुरू हुई यह सेवा; मंत्री ने खुद दी जानकारी
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar land documents : बिहार सरकार ने जमीन से जुड़े मामलों में आम जनता को बड़ी राहत देने वाला एक अहम फैसला लिया है। अब जमीन से संबंधित कागजात की सत्यापित नकल पाने के लिए लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। इसकी जानकारी बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दी है। सरकार के इस कदम को डिजिटल बिहार की दिशा में एक मजबूत पहल माना जा रहा है।


उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे अपने मोबाइल फोन या कंप्यूटर के माध्यम से जमीन के दस्तावेजों की सत्यापित कॉपी के लिए आवेदन कर सकेगा। इसके लिए न तो अंचल कार्यालय जाना होगा और न ही लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ेगा। ऑनलाइन व्यवस्था के लागू होने से आम नागरिकों का समय, पैसा और मेहनत—तीनों की बचत होगी।


अब तक जमीन से जुड़े कागजात निकलवाना लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बना हुआ था। कई मामलों में लोगों को 15 से 30 दिन या उससे भी ज्यादा समय तक इंतजार करना पड़ता था। कागजात के लिए बार-बार कार्यालय जाना, कर्मचारियों से मिलना, फाइल की स्थिति पूछना और छुट्टी लेकर लाइन में लगना आम बात थी। दूर-दराज के इलाकों से आने वाले लोगों को यात्रा पर अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता था। लेकिन नई ऑनलाइन व्यवस्था के लागू होने के बाद यह प्रक्रिया काफी सरल और तेज हो जाएगी।


सरकारी जानकारी के मुताबिक, अब ऑनलाइन आवेदन करने के बाद 7 से 14 दिनों के भीतर जमीन के दस्तावेजों की सत्यापित नकल उपलब्ध करा दी जाएगी। आवेदन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने के कारण काम की गति तेज होगी और अनावश्यक देरी की समस्या भी कम होगी। इसके साथ ही आवेदक अपने आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन ही ट्रैक कर सकेंगे, जिससे उन्हें बार-बार दफ्तर जाकर जानकारी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


सरकार का मानना है कि इस नई डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता भी बढ़ेगी। जब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, तो इसमें मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और बिचौलियों की भूमिका लगभग खत्म हो जाएगी। इससे भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर भी काफी हद तक रोक लगेगी। दस्तावेज सीधे सिस्टम के जरिए तैयार होंगे और निर्धारित समय सीमा में लोगों को उपलब्ध कराए जाएंगे।


यह सुविधा ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों के लोगों के लिए समान रूप से लाभकारी साबित होगी। खासकर किसानों, बुजुर्गों, मजदूरों और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था बेहद उपयोगी होगी। ऐसे लोग जो रोज़गार या उम्र के कारण बार-बार दफ्तर नहीं जा सकते, वे अब आसानी से अपने घर से ही आवेदन कर सकेंगे।


उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि आम जनता को सरल, सुलभ और पारदर्शी सेवाएं मिलें। जमीन से जुड़े मामलों में अक्सर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए सरकार लगातार सुधार की दिशा में काम कर रही है। सत्यापित नकल को ऑनलाइन करना उसी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।


उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में जमीन से संबंधित अन्य सेवाओं को भी पूरी तरह डिजिटल करने की योजना है, ताकि लोगों को किसी भी तरह की असुविधा न हो। सरकार चाहती है कि राजस्व और भूमि सुधार विभाग की सेवाएं तकनीक के माध्यम से आम जनता तक आसानी से पहुंचें।


जमीन से जुड़े कागजात की सत्यापित नकल को ऑनलाइन उपलब्ध कराना बिहार सरकार का एक बड़ा और सकारात्मक कदम है। इससे न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली आसान और तेज होगी, बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी सरकारी व्यवस्था पर और मजबूत होगा। डिजिटल सुविधा के इस विस्तार से यह उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में जमीन से जुड़े विवादों और शिकायतों में भी कमी आएगी और लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा।