Nitish Kumar : गजब संयोग: मार्च महीने में ही पहली बार CM पद की शपथ ली थी... नीतीश कुमार मार्च में ही छोड़ रहे मुख्यमंत्री की कुर्सी

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का लंबा सियासी सफर रहा है। साल 2000 से लेकर 2025 तक उन्होंने 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जानिए कब-कब बने सीएम और कैसे बदलते रहे राजनीतिक समीकरण।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 05, 2026, 11:49:20 AM

Nitish Kumar : गजब संयोग: मार्च महीने में ही पहली बार CM पद की शपथ ली थी... नीतीश कुमार मार्च में ही छोड़ रहे मुख्यमंत्री की कुर्सी

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Nitish Kumar : बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक अध्याय जुड़ा, जब जेडीयू के नेता नीतीश कुमार ने खुद मार्च के महीने में ट्वीट कर यह जानकारी दी है कि अब वह बिहार की राजनीति से दूर हो रहे हैं। इसके लिए उन्होंने जो रास्ता चुना है वह रास्ता है राज्यसभा का चुनाव लड़ना। यानी अब नीतीश कुमार बिहार के सीएम पद से इस्तीफा देने वाले हैं और वह राज्यसभा के मेंबर बनने जा रहे हैं। अब यह महज संयोग कहा जाए या कुछ और लेकिन नीतीश कुमार पहली बार सीएम मार्च के महीने में ही बने थे और अब सीएम का पद छोड़ने का फैसला भी मार्च के महीने में किया है। 


नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति में ‘सुशासन बाबू’ और कई बार गठबंधन बदलने के कारण ‘पलटू मास्टर’ जैसे राजनीतिक विशेषण भी दिए जाते हैं। लेकिन एक बात साफ है कि पिछले 25 वर्षों में बिहार की राजनीति उनके इर्द-गिर्द ही घूमती रही है।


पहली बार 2000 में बने थे मुख्यमंत्री

नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च 2000 को बिहार के मुख्यमंत्री बने थे। उस समय उन्होंने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई थी। हालांकि उस वक्त उनके पास विधानसभा में बहुमत नहीं था। ऐसे में उन्हें बहुमत साबित करने का मौका नहीं मिला और मात्र सात दिन बाद 10 मार्च 2000 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। यह नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर की शुरुआत थी, लेकिन आगे चलकर यही नेता बिहार की राजनीति का सबसे प्रभावशाली चेहरा बन गया।


2005 में प्रचंड बहुमत के साथ वापसी

करीब पांच साल बाद बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। विधानसभा चुनाव में एनडीए को बड़ी जीत मिली और 24 नवंबर 2005 को नीतीश कुमार ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस कार्यकाल में उन्होंने सड़क, शिक्षा, कानून व्यवस्था और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर कई बड़े फैसले लिए, जिससे उनकी छवि एक विकासवादी नेता के रूप में मजबूत हुई।


2010 में तीसरी बार मिली सत्ता

नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को 2010 के विधानसभा चुनाव में भी शानदार जीत मिली। इसके बाद उन्होंने 26 नवंबर 2010 को तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह कार्यकाल उन्होंने पूरे पांच साल तक चलाया और बिना इस्तीफा दिए सरकार चलाई। इस दौरान बिहार में विकास और प्रशासनिक सुधारों की काफी चर्चा रही।


2015 में चौथी और पांचवीं बार शपथ

2014 के लोकसभा चुनाव के बाद बिहार की राजनीति में समीकरण बदले। 2015 में नीतीश कुमार ने पहले 22 फरवरी 2015 को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को जीत मिली और 20 नवंबर 2015 को उन्होंने पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस दौर में जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस का महागठबंधन सत्ता में आया था।


2017 में फिर बदला राजनीतिक समीकरण

जुलाई 2017 में बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आया। आरजेडी से मतभेद के बाद नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर फिर से एनडीए का दामन थाम लिया। इसके बाद 27 जुलाई 2017 को उन्होंने छठी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।


2020 में सातवीं बार बने मुख्यमंत्री

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में एनडीए को बहुमत मिला और 16 नवंबर 2020 को नीतीश कुमार ने सातवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि इस बार जेडीयू सीटों के मामले में भाजपा से पीछे रही, लेकिन गठबंधन की सहमति से उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाया गया।


2022 में महागठबंधन के साथ आठवीं बार शपथ

अगस्त 2022 में एक बार फिर बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ। नीतीश कुमार ने एनडीए से नाता तोड़कर आरजेडी और कांग्रेस के साथ महागठबंधन सरकार बनाई। इसके बाद 10 अगस्त 2022 को उन्होंने आठवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।


2024 में फिर एनडीए में वापसी

जनवरी 2024 में नीतीश कुमार ने एक और बड़ा राजनीतिक फैसला लिया। उन्होंने महागठबंधन छोड़कर फिर से एनडीए में वापसी कर ली। इसके बाद 28 जनवरी 2024 को उन्होंने नौवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस फैसले ने राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा संदेश दिया था।


2025 में दसवीं बार बने मुख्यमंत्री

बिहार की राजनीति में लगातार बने रहने का सिलसिला जारी रखते हुए 20 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इतने लंबे समय तक सत्ता में बने रहना भारतीय राजनीति में एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है।


नीतीश कुमार का यह राजनीतिक सफर बताता है कि बिहार की सत्ता में उनकी पकड़ कितनी मजबूत रही है। गठबंधन बदलने के बावजूद उन्होंने हर बार राजनीतिक समीकरण अपने पक्ष में बनाने में सफलता हासिल की है।


करीब ढाई दशक से बिहार की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा रहे नीतीश कुमार का यह सफर भारतीय राजनीति में एक अनोखा उदाहरण बन गया है, जहां एक ही नेता अलग-अलग गठबंधनों के साथ कई बार मुख्यमंत्री पद तक पहुंचा है।