1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mon, 12 Jan 2026 05:24:03 PM IST
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Bihar News: बिहार में महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की जा रही है। राज्य में पहली बार केरल मॉडल पर आधारित महिलाओं के लिए प्रोफेशनल ड्राइविंग ट्रेनिंग शुरू की जा रही है। इस योजना के तहत नालंदा, सुपौल, मोतिहारी और बांका जिलों में विशेष ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएंगे, जहां कुल 6,000 महिलाओं को प्रोफेशनल ड्राइवर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
यह योजना केंद्र सरकार की सहायता से संचालित होगी, जिसके तहत चारों प्रशिक्षण केंद्रों पर करीब 68 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन केंद्रों में महिलाओं को ट्रक, बस, टैक्सी, टेंपो और बाइक चलाने की आधुनिक और प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी। खास बात यह है कि यहां ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक का भी निर्माण किया जाएगा, जहां प्रशिक्षण के बाद महिलाओं की तकनीकी दक्षता की जांच होगी। सफल प्रशिक्षणार्थियों को ड्राइविंग लाइसेंस और प्रोफेशनल सर्टिफिकेट प्रदान किए जाएंगे।
योजना के अनुसार हर साल करीब 1,500 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह चार वर्षों में 6,000 महिलाओं को ड्राइविंग के क्षेत्र में दक्ष बनाकर रोजगार योग्य बनाया जाएगा। प्रशिक्षण केंद्रों में पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल होगा, जहां अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सभी महिलाएं होंगी। इससे प्रशिक्षण लेने वाली महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
सरकार का मानना है कि ड्राइविंग और परिवहन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। वर्तमान में यह क्षेत्र पुरुष-प्रधान माना जाता है, लेकिन इस पहल से महिलाओं को बस, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक वाहनों के संचालन में सीधा अवसर मिलेगा। इससे वे सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सकेंगी।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को केवल वाहन चलाना ही नहीं, बल्कि ट्रैफिक नियम, सड़क सुरक्षा, वाहन रखरखाव और आपात स्थितियों से निपटने की भी जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा उन्हें डिजिटल सिस्टम, जीपीएस और आधुनिक वाहन तकनीक से भी परिचित कराया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और खासकर ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलना है। आने वाले समय में यह पहल बिहार में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल बन सकती है।