Bihar Vidhan Parishad : बिहार विधान परिषद में शारीरिक शिक्षकों की बहाली को लेकर उठे सवाल के बीच एक टिप्पणी को लेकर सदन का माहौल गरमा गया। सत्ता पक्ष के एमएलसी नवल किशोर यादव की एक टिप्पणी पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई और इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए मुद्दा बनाया। राजद की महिला एमएलसी उर्मिला ठाकुर ने सदन में इस बयान को लेकर विरोध दर्ज कराया और कहा कि सदन के अंदर महिलाओं के प्रति इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
दरअसल, विधान परिषद में शारीरिक शिक्षकों की बहाली का मुद्दा उठाया गया था। सत्ता पक्ष के एमएलसी नवल किशोर यादव, जीवन कुमार और निर्दलीय एमएलसी वंशीधर बृजवासी ने सवाल किया कि विद्यालय में कार्यरत प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षकों को प्रधानाध्यापक के पद पर प्रोन्नति और सभी प्रकार के पुनर्नति का नाम चार माह के अंदर देने का स्पष्ट आदेश हाईकोर्ट से है लेकिन से लागू नहीं किया जा रहा है। इस पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि विधि विभाग को मामला भेजा जाएगा
इस पर बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने जवाब देते हुए एक टिप्पणी कर दी, जिस पर सदन में चर्चा शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि विधान परिषद में फिलहाल उन लोगों को बोलने का मौका दिया जाना चाहिए जिन्हें आने वाले समय में चुनाव लड़ना है। मंत्री की इस टिप्पणी के बाद सत्ता पक्ष के एमएलसी नवल किशोर यादव अपनी सीट से खड़े हुए और उन्होंने इस बात पर प्रतिक्रिया दी।
नवल किशोर यादव ने कहा कि महिलाओं को बच्चा पैदा करना और नेताओं को चुनाव लड़ना सीखने की जरूरत नहीं पड़ती है। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ना एक राजनीतिक प्रक्रिया है और जो लोग राजनीति में हैं, उन्हें इसका अनुभव होता है। हालांकि उनकी इस टिप्पणी पर सदन में मौजूद महिला सदस्यों ने आपत्ति जताई।
महिला एमएलसी ने उठाई आवाज
नवल किशोर यादव की टिप्पणी के बाद विधान परिषद में मौजूद महिला एमएलसी अपनी जगह से खड़ी हो गईं। उन्होंने कहा कि सदन जैसे गरिमामय स्थान पर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान हर जगह होना चाहिए और खासकर लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले सदन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
राजद की एमएलसी उर्मिला ठाकुर ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सदन में सभी सदस्य जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए बातचीत के दौरान शब्दों का चयन सोच-समझकर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिला सम्मान केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने मांग की कि सदन की कार्यवाही के दौरान ऐसी भाषा से बचा जाना चाहिए जिससे किसी वर्ग या व्यक्ति की भावनाएं आहत हों।
विधान परिषद में बढ़ी राजनीतिक गर्मी
शारीरिक शिक्षक बहाली का मुद्दा जहां युवाओं और रोजगार से जुड़ा हुआ था, वहीं टिप्पणी विवाद के बाद सदन में राजनीतिक गर्मी बढ़ गई। विपक्ष ने इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से मामले को लेकर सफाई दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। बिहार विधान परिषद में यह मामला ऐसे समय उठा है जब राज्य में रोजगार, शिक्षक बहाली और युवाओं से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। ऐसे में महिला सम्मान को लेकर हुई बहस ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
अब देखना होगा कि इस मामले पर आगे सदन में क्या रुख अपनाया जाता है और क्या संबंधित सदस्य की ओर से कोई स्पष्टीकरण दिया जाता है। फिलहाल महिला एमएलसी के विरोध के बाद यह मुद्दा विधान परिषद में चर्चा का विषय बना हुआ है।





