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Bihar News : अब सिर्फ पढ़ाई नहीं चलेगी! बिहार के छात्रों को डिग्री से पहले करनी होगी 120 घंटे की इंटर्नशिप; नई गाइडलाइन लागू

बिहार के स्नातक छात्रों के लिए बड़ी खबर है। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में इंटर्नशिप को अनिवार्य कर दिया है। अब छात्रों को डिग्री क्रेडिट पाने के लिए 120 घंटे की इंटर्नशिप पूरी करनी होगी, जो NEP-2020 के तहत लागू की गई है।

Bihar University Internship,
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Tejpratap
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Bihar News : बिहार के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले स्नातक (यूजी) छात्रों के लिए अब इंटर्नशिप अनिवार्य कर दी गई है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने ‘इंटर्नशिप गाइडलाइंस फॉर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स इन यूनिवर्सिटीज ऑफ बिहार’ को मंजूरी दे दी है। इस संबंध में शनिवार को राज्यपाल सचिवालय की ओर से अधिसूचना जारी कर सभी विश्वविद्यालयों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।


नई व्यवस्था के तहत अब बिहार के सभी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में चार वर्षीय सीबीसीएस (CBCS) आधारित स्नातक पाठ्यक्रम के छात्रों को इंटर्नशिप करना अनिवार्य होगा। यह इंटर्नशिप उनके शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा होगी और इसके लिए छात्रों को निर्धारित क्रेडिट भी प्रदान किए जाएंगे।


जारी गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक छात्र-छात्रा को चार से छह सप्ताह की अवधि में कुल 120 घंटे की इंटर्नशिप पूरी करनी होगी। यह इंटर्नशिप चार क्रेडिट की होगी, जिसका लाभ छात्रों को पांचवें सेमेस्टर में मिलेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होगा, जो भविष्य में रोजगार और करियर निर्माण में मददगार साबित होगा।


गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि इंटर्नशिप व्यक्तिगत रूप से करनी होगी। किसी भी प्रकार की समूह इंटर्नशिप को मान्यता नहीं दी जाएगी। छात्रों को स्वयं निर्धारित संस्थानों में जाकर कार्य करना होगा और वहां से अनुभव प्राप्त करना होगा। कुल 120 घंटों की इंटर्नशिप में कम-से-कम 90 घंटे संबंधित संस्थान में कार्य करना अनिवार्य होगा। शेष समय रिपोर्ट तैयार करने, मूल्यांकन प्रक्रिया और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए निर्धारित किया गया है।


नई व्यवस्था चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम में एग्जिट प्वाइंट के प्रावधानों के साथ भी लागू होगी। यह नियम द्वितीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के बाद के एग्जिट विकल्पों पर भी प्रभावी रहेगा। वहीं नियमित छात्रों को चौथे सेमेस्टर की परीक्षा समाप्त होने के बाद ग्रीष्मावकाश के दौरान इंटर्नशिप पूरी करनी होगी।


यदि कोई छात्र किसी कारणवश निर्धारित समय में इंटर्नशिप पूरी नहीं कर पाता है, तो उसे पांचवें सेमेस्टर की समाप्ति से पहले इसे पूरा करना होगा। ऐसा नहीं करने पर संबंधित क्रेडिट प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है। विश्वविद्यालयों को भी निर्देश दिया गया है कि वे छात्रों को समय पर इंटर्नशिप उपलब्ध कराने और उसके मूल्यांकन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें।


इंटर्नशिप के लिए संस्थानों के चयन को लेकर भी प्राथमिकता तय की गई है। सबसे पहले केंद्र और राज्य सरकार के विभागों में इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके बाद सार्वजनिक उपक्रम, स्थानीय निकाय, पंचायत संस्थाएं, सरकारी सहायता प्राप्त स्वायत्त संस्थान, निजी उद्योग, प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठन (NGO) और अन्य पंजीकृत संस्थानों को शामिल किया जाएगा।


शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव भी देगा। इससे उनकी पेशेवर दक्षता, संचार कौशल, नेतृत्व क्षमता और रोजगार योग्यता में सुधार होगा। नई शिक्षा नीति का भी यही उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योग, प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के कार्यकलापों से जोड़कर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जाए।


राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी इस नई गाइडलाइन के बाद बिहार के उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई का स्वरूप अधिक व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख बनने की उम्मीद जताई जा रही है। छात्रों को अब डिग्री के साथ-साथ कार्य अनुभव का भी लाभ मिलेगा, जो प्रतिस्पर्धी दौर में उनके लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है।