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Bihar News : SVU के सवालों से घिरे रिशु श्री, अभिलाषा से पारिवारिक संबंध तो योगेश के लिए किया सिर्फ यह काम; बड़े अधिकारी के नाम पर साधी चुप्पी

बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले की जांच ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की टीम मुख्य आरोपी रिशु श्री से लगातार लंबी पूछताछ कर रही है, लेकिन कई अहम सवालों पर उनकी चुप्पी जांच एजेंसी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। करीब 15 घंटे

Bihar News
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© file photo **बिहार टेंडर घोटाले में बड़ा खुलासा जा
Tejpratap
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6 मिनट

Bihar News : बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए-नए राज सामने आ रहे हैं। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की टीम मुख्य आरोपी रिशु श्री से लगातार लंबी पूछताछ कर रही है, लेकिन अब तक कई अहम और प्रभावशाली नामों पर उनकी चुप्पी जांच एजेंसी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। करीब 15 घंटे की पूछताछ के बावजूद जांच टीम को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका है।


सूत्रों के मुताबिक, SVU ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए तीन अलग-अलग टीमों का गठन किया है, जो अलग-अलग शिफ्ट में आरोपी से सवाल कर रही हैं। पूछताछ का केंद्र टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, कमीशन के नेटवर्क और अफसरों की भूमिका पर आधारित है।


शुरुआती पूछताछ में चुप्पी, बाद में दिए टालमटोल जवाब

जांच अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ की शुरुआत में रिशु श्री पूरी तरह से खामोश रहे। कई सवालों का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। जब SVU की टीम ने लगातार दबाव बनाया और सवाल दोहराए, तो उन्होंने बेहद संक्षिप्त और टालमटोल वाले जवाब देना शुरू किया। सूत्र बताते हैं कि रिशु श्री विशेष रूप से बड़े अधिकारियों और कथित सिंडिकेट के सरगनाओं के नामों पर बोलने से बचते रहे। कई बार उन्होंने सवालों को अनसुना कर दिया, जिससे जांच टीम को बार-बार प्रश्न दोहराने पड़े।


वीडियोग्राफी शुरू होते ही बदला रवैया

पूछताछ की वीडियोग्राफी शुरू होने के बाद आरोपी के व्यवहार में कुछ बदलाव देखने को मिला। उन्होंने कुछ सवालों का जवाब देना शुरू किया, लेकिन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर वे लगातार चुप्पी साधते रहे। SVU पूरी प्रक्रिया को रिकॉर्ड कर रही है ताकि भविष्य में इसे अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सके। हालांकि, रिकॉर्डिंग के दौरान भी आरोपी कई बार लंबी चुप्पी में चले जाते हैं, जिससे जांच की दिशा प्रभावित हो रही है।


टेंडर सिस्टम और कमीशन नेटवर्क पर फोकस

जांच का मुख्य केंद्र विभिन्न सरकारी विभागों में टेंडर प्रक्रिया में कथित हेराफेरी है। SVU की टीम ने जल संसाधन विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, बुडको, भवन निर्माण विभाग और BMSICL के टेंडरों से जुड़े मामलों पर विस्तृत पूछताछ की है।


आरोप है कि टेंडर आवंटन में नियमों को दरकिनार कर मनचाही कंपनियों को फायदा पहुंचाया जाता था। इसके बदले में मोटे कमीशन के लेन-देन की बात भी सामने आ रही है। SVU यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में किन-किन अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका थी।


GeM पोर्टल पर सेटिंग के गंभीर आरोप

पूछताछ में SVU ने GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल से जुड़े टेंडरों पर भी सवाल उठाए हैं। टीम ने पूछा कि देशभर की कंपनियों के बीच पारदर्शी प्रक्रिया होने के बावजूद कैसे चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया।सूत्रों के अनुसार, आरोपी से यह जानने की कोशिश की गई कि किन तरीकों से टेंडर की शर्तों में बदलाव किया जाता था और किन लोगों की मदद से यह पूरा नेटवर्क संचालित होता था। हालांकि, इस हिस्से पर भी आरोपी ने अधिकांश सवालों से किनारा कर लिया।


सिंडिकेट से जुड़े नामों पर भी पूछताछ

SVU ने रिशु श्री से कथित सिंडिकेट में शामिल कई लोगों के नाम लेकर पूछताछ की। इनमें तारणी दास, मुमुक्षु चौधरी और उमेश सिंह जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। आरोपी ने स्वीकार किया कि इनसे उनकी पहचान विभागीय कामकाज के दौरान हुई, लेकिन आगे की भूमिका और वित्तीय लेन-देन पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। जांच टीम को शक है कि यह पूरा मामला सिर्फ व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था।


कुछ नामों पर खुलकर बात, कुछ पर पूरी चुप्पी

पूछताछ के दौरान कुछ नामों पर आरोपी ने सीमित जानकारी दी, जबकि कुछ प्रभावशाली नामों पर पूरी तरह चुप्पी साध ली। उन्होंने अभिलाषा शर्मा को लेकर कहा कि उनके साथ पारिवारिक संबंध जैसे थे। वहीं योगेन्द्र सागर को विदेश यात्रा कराने के आरोप पर उन्होंने दावा किया कि सिर्फ ट्रैवल एजेंसी से परिचय कराया गया था। लेकिन जब आनंद किशोर जैसे प्रभावशाली नाम और विभागीय प्रभाव के इस्तेमाल पर सवाल उठे, तो आरोपी ने पूरी तरह से जवाब देने से इनकार कर दिया।


3 दिन की रिमांड पर टिकी जांच की दिशा

SVU सूत्रों के अनुसार, रिशु श्री की रिमांड अवधि अभी तीन दिन और बढ़ाई गई है। यह समय जांच एजेंसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि दबाव और सबूतों के आधार पर आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसी का फोकस अब पूरे टेंडर घोटाले के “सिंडिकेट नेटवर्क” की कड़ियों को जोड़ने पर है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस कथित घोटाले में कौन-कौन लोग शामिल थे और पैसा किस स्तर तक पहुंचता था।


नजरें अगले तीन दिनों पर

फिलहाल पूरा मामला जांच के निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। SVU की टीम लगातार पूछताछ कर रही है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले 72 घंटे में कई अहम राज सामने आ सकते हैं। बिहार का यह टेंडर घोटाला अब सिर्फ एक जांच नहीं, बल्कि एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक नेटवर्क की परतें खोलने वाला मामला बनता जा रहा है। सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या रिशु श्री आगे चुप्पी तोड़ेंगे या जांच एजेंसी को अभी और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।