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BIHAR TEACHER NEWS : BPSC शिक्षकों की नौकरी पर संकट! जांच में बड़ा खुलासा, इतने लोगों का सेवा होगा समाप्त; शिक्षा माफिया के नेटवर्क का भी खुलेगा राज

सहरसा में बीपीएससी से चयनित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच तेज हो गई है, जिससे जिले में हड़कंप मच गया है। कई शिक्षकों के दस्तावेज संदिग्ध पाए जाने से नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

BIHAR TEACHER
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Tejpratap
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4 मिनट

BIHAR TEACHER NEWS : बिहार के सहरसा जिले में बीपीएससी के माध्यम से चयनित शिक्षक अब प्रमाण पत्रों की जांच के घेरे में आ गए हैं। पिछले तीन से चार वर्षों के दौरान बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा आयोजित प्रतियोगिता परीक्षाओं के आधार पर जिले में बड़ी संख्या में विद्यालय अध्यापकों की नियुक्ति की गई थी। लेकिन अब इन नियुक्तियों की प्रक्रिया और प्रस्तुत किए गए शैक्षणिक प्रमाण पत्रों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


जिले में टीआरई-1, टीआरई-2 और टीआरई-3 के तहत कुल मिलाकर लगभग चार हजार से अधिक शिक्षकों की बहाली की गई है। इन नियुक्तियों के तहत विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी को दूर करने का प्रयास किया गया था, लेकिन अब सत्यापन प्रक्रिया के दौरान कई अनियमितताएं सामने आने लगी हैं। शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे दस्तावेजों के जांच अभियान में यह खुलासा हुआ है कि कई शिक्षकों ने कथित रूप से फर्जी या संदिग्ध प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल की है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से जिले में कुल 3895 विद्यालय अध्यापकों की नियुक्ति की गई थी। इनमें टीआरई-1 के तहत 1758 शिक्षक, टीआरई-2 के तहत 1169 शिक्षक तथा टीआरई-3 के तहत 968 विद्यालय अध्यापक शामिल हैं। इन सभी शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों का विस्तृत सत्यापन विभाग द्वारा शुरू कर दिया गया है, जिसके चलते संबंधित शिक्षकों के बीच चिंता और भय का माहौल देखा जा रहा है।


सत्यापन की प्रक्रिया विशेष रूप से कंप्यूटर विज्ञान विषय के विद्यालय अध्यापकों के मामले में अधिक गंभीर पाई गई है। हाल ही में इस विषय के लगभग दो दर्जन से अधिक शिक्षकों के प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी की आशंका सामने आई है। इसके बाद संबंधित शिक्षकों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है और उनसे दस्तावेजों की पुनः पुष्टि करने को कहा गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन मामलों में गंभीर अनियमितता पाए जाने पर नौकरी पर भी खतरा मंडरा सकता है।


यह पहली बार नहीं है जब बिहार में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े की बात सामने आई हो। इससे पहले वर्ष 2012 से 2015 के बीच भी ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर हुई शिक्षक नियुक्तियों में कई फर्जी शिक्षक चिह्नित किए गए थे। उस समय भी बड़ी संख्या में प्रमाण पत्रों की जांच के बाद कई नियुक्तियां रद्द की गई थीं और संबंधित मामलों में कार्रवाई की गई थी।


वर्तमान स्थिति में यह भी आशंका जताई जा रही है कि शिक्षा माफिया का नेटवर्क केवल प्रारंभिक या माध्यमिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव उच्च स्तरीय भर्ती प्रक्रियाओं तक भी फैल चुका है। इसी कारण अब बीपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं के माध्यम से चयनित शिक्षकों की भी गहन जांच की जा रही है।


शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी शिकायतों और संदिग्ध मामलों की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अपात्र या फर्जी दस्तावेज के आधार पर नियुक्त हुए व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।


इस पूरे मामले ने जिले के शिक्षा तंत्र में हलचल मचा दी है। जहां एक ओर योग्य और मेहनती शिक्षक अपनी नौकरी को लेकर आश्वस्त हैं, वहीं दूसरी ओर जांच के दायरे में आए शिक्षकों के बीच अनिश्चितता और तनाव का माहौल बना हुआ है। जांच प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।