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बिल्डरों के खिलाफ रेरा का बड़ा एक्शन, पैसा नहीं देने पर पकड़े जा रहे, भुगतान के बाद ही छूट रहे

रेरा बिहार ने बिल्डरों के खिलाफ विशेष वसूली अभियान चलाकर घर खरीदारों को लाखों रुपये दिलाए। आदेश नहीं मानने पर एक प्रोमोटर को पुलिस ने हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश किया।

बिल्डरों के खिलाफ रेरा का बड़ा एक्शन, पैसा नहीं देने पर पकड़े जा रहे, भुगतान के बाद ही छूट रहे
Tejpratap
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6 मिनट

पटना :  बिहार में घर खरीदने वाले लोगों की शिकायतों पर अब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा), बिहार ने सख्ती बढ़ा दी है। प्राधिकरण ने आदेशों की अनदेखी करने वाले प्रोमोटरों और बिल्डरों के खिलाफ विशेष वसूली अभियान शुरू किया है। इसके तहत उन मामलों में तेजी से कार्रवाई की जा रही है, जिनमें रेरा के आदेश के बावजूद घर खरीदारों को उनकी बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया।

रेरा बिहार के इस अभियान का असर अब सामने आने लगा है। पिछले एक महीने में सर्टिफिकेट (नीलाम-पत्र) वादों के निष्पादन के दौरान कई मामलों में घर खरीदारों को भुगतान कराया गया है। वहीं, रेरा अधिनियम का उल्लंघन करने वाले प्रोमोटरों से दंड की राशि भी वसूल की गई है।

आदेश नहीं माना तो पुलिस ने हिरासत में लिया

सबसे अहम कार्रवाई 18 अगस्त को सर्टिफिकेट वाद संख्या 4924/2025-26 में हुई। इस मामले में चूककर्ता प्रोमोटर ने शिकायतकर्ता मो. काशिफ यूनुस को कुल 13 लाख रुपये का भुगतान किया। मामला इजिओन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ था।

दरअसल, शिकायतकर्ता ने कंपनी के खिलाफ रेरा में शिकायत दर्ज कराई थी। वर्ष 2022 में प्राधिकरण ने शिकायतकर्ता के पक्ष में 67.64 लाख रुपये के भुगतान का आदेश दिया था। लेकिन बिल्डर ने आदेश के बावजूद राशि का भुगतान नहीं किया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने उसी वर्ष निष्पादन वाद दायर किया।

वर्ष 2023 में मामले के निपटारे के दौरान बकाया राशि की वसूली के लिए सर्टिफिकेट वाद दायर करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद सर्टिफिकेट वाद की सुनवाई शुरू हुई। बताया गया कि प्रोमोटर लगातार अदालत में उपस्थित नहीं हो रहा था। इसके बाद उसके खिलाफ वारंट जारी किया गया।

18 अगस्त को पुलिस ने प्रोमोटर को हिरासत में लेकर सर्टिफिकेट पदाधिकारी अनिमेष पांडेय की अदालत में पेश किया। कार्रवाई के दौरान प्रोमोटर ने अदालत में ही शिकायतकर्ता को 5.80 लाख रुपये नकद भुगतान किया और 7.20 लाख रुपये का चेक सौंपा, जिसे बाद में भुना लिया गया। इसके अलावा शेष राशि के भुगतान के लिए छह किश्तों के छह पोस्ट-डेटेड चेक भी दिए गए।

दूसरे घर खरीदार को भी मिली राहत

इसी अदालत में सर्वोदय मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक अन्य मामले में भी घर खरीदार को राहत मिली। सर्टिफिकेट वाद संख्या 4934/2025-26 में शिकायतकर्ता पवन कुमार अग्रवाल को 29.51 लाख रुपये की कुल बकाया राशि के विरुद्ध 7 लाख रुपये का चेक दिया गया। इस मामले में आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

वहीं, इसी प्रोमोटर से जुड़े सर्टिफिकेट वाद संख्या 2120/2024-25 में शिकायतकर्ता पीयूष श्रीवास्तव को भी 7 लाख रुपये का चेक मिला। इससे पहले प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को 27.50 लाख रुपये लौटाए जा चुके हैं। अब भी 11 लाख रुपये का भुगतान किया जाना बाकी है।

सिर्फ खरीदारों की रकम नहीं, दंड भी वसूल रहा रेरा

रेरा बिहार की कार्रवाई सिर्फ घर खरीदारों की बकाया राशि तक सीमित नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रोमोटरों पर लगाए गए दंड की वसूली भी सर्टिफिकेट वादों के जरिए की जा रही है। ऐसे ही दो मामलों में दंड राशि की वसूली की गई है। पहली कार्रवाई टेक्नोकल्चर बिल्डिंग सेंटर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ हुई। कंपनी की परियोजना ‘वास्तु विहार, मोतिहारी-चरण III’ के संबंध में रेरा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन पाया गया था। इसके बाद प्रोमोटर पर 10 लाख रुपये का दंड लगाया गया। दंड का भुगतान नहीं किए जाने पर सर्टिफिकेट वाद दायर किया गया और अब राशि की वसूली की गई है।

इसी तरह अबू कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड पर लगाए गए 10 लाख रुपये के दंड का भुगतान नहीं होने के बाद सर्टिफिकेट वाद दायर किया गया। इस मामले में भी दंड राशि की वसूली की गई है। दोनों मामलों में कार्रवाई सर्टिफिकेट पदाधिकारी अमरेन्द्र शाही की अदालत में हुई।

रेरा परिसर में ही चलेगी वसूली की अदालत

घर खरीदारों को राहत देने के लिए रेरा बिहार ने अपनी व्यवस्था को और मजबूत किया है। प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को सर्टिफिकेट पदाधिकारी के रूप में अधिसूचित किया गया है। इन अधिकारियों की अदालतें रेरा परिसर में ही संचालित होती हैं। रेरा बिहार में अनिमेष पांडेय सचिव के पद पर और अमरेन्द्र शाही वरीय भूमि राजस्व पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें सर्टिफिकेट पदाधिकारी की जिम्मेदारी भी दी गई है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा घर खरीदारों को होगा। यदि कोई प्रोमोटर रेरा के आदेश का पालन नहीं करता है और तय राशि का भुगतान नहीं करता, तो खरीदार को वसूली के लिए किसी दूसरे मंच का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। रेरा के स्तर पर ही सर्टिफिकेट वाद के जरिए बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।

रेरा बिहार की इस सख्ती से उन बिल्डरों पर दबाव बढ़ने की उम्मीद है, जो प्राधिकरण के आदेशों के बावजूद घर खरीदारों का पैसा लौटाने में आनाकानी करते रहे हैं। वहीं, घर खरीदारों के लिए यह कार्रवाई इस मायने में महत्वपूर्ण है कि अब रेरा के आदेशों के अमल और बकाया राशि की वसूली को लेकर प्राधिकरण ने अपनी कार्रवाई को ज्यादा प्रभावी बनाया है।