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सोलर सिस्टम की संख्या से तय होगी गांवों की रैंकिंग, बिहार के टॉप सोलर विलेज को मिलेगा इंसेंटिव

Bihar Solar Village Scheme: बिहार में सोलर विलेज योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी है। गांवों में लगे सोलर सिस्टम की संख्या के आधार पर रैंकिंग की जाएगी और बेहतर प्रदर्शन करने वाले सोलर विलेज को बिजली कंपनी की ओर से इंसेंटिव दिया जाएगा।

Bihar News
प्रतिकात्मक तस्वीर
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Mukesh Srivastava
4 मिनट

Bihar Solar Village Scheme: बिहार में बिजली कंपनी अब सोलर विलेज योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत गांवों में काम कर रहे सोलर सिस्टम की संख्या के आधार पर उनकी रैंकिंग की जाएगी। रैंकिंग के आधार पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले गांवों को सोलर विलेज के रूप में चिन्हित किया जाएगा। शीर्ष स्थान हासिल करने वाले सोलर विलेज को बिजली कंपनी की ओर से इंसेंटिव यानी प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।



योजना के तहत गांवों में लगाए गए विभिन्न सोलर सिस्टम को रैंकिंग का आधार बनाया जाएगा। इनमें स्कूलों में लगे सोलर सिस्टम, घरों की छतों पर लगाए गए सोलर पैनल और स्वास्थ्य केंद्रों पर लगे सिस्टम शामिल होंगे। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में भी घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने का काम शुरू हो चुका है। 



इन रूफटॉप सोलर सिस्टम की संख्या भी किसी गांव को सोलर विलेज के रूप में चिन्हित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बिजली कंपनी के अनुसार, अब लगाए जा रहे सोलर सिस्टम को ग्रिड से कनेक्ट किया जा रहा है। हालांकि, गांवों में पहले से बड़ी संख्या में काम कर रही सोलर स्ट्रीट लाइट को सोलर विलेज की रैंकिंग में शामिल नहीं किया जाएगा।



बिजली कंपनी के संबंधित अधिकारी के अनुसार, किसी गांव को पूरी तरह सोलर विलेज के रूप में विकसित करना फिलहाल संभव नहीं है। हालांकि, प्रयास यह है कि गांवों में अधिक से अधिक सोलर सिस्टम लगाए जाएं और उन्हें ग्रिड से जोड़ा जाए। अधिकारी के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग स्तर पर सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इनकी संख्या बढ़ने से गांवों को सोलर विलेज के रूप में विकसित करने की दिशा में मदद मिलेगी।



बिहार में सोलर विलेज की दिशा में पहले भी प्रयोग हो चुका है। वर्ष 2014 में जहानाबाद जिले के धरनई गांव में कुछ संस्थाओं की मदद से सोलर माइक्रो ग्रिड स्थापित किया गया था। उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को लेकर लोगों के बीच कई तरह की धारणाएं थीं। हालांकि, बाद के वर्षों में रखरखाव के अभाव में यह प्रोजेक्ट बंद हो गया। इसके अलावा, हाल ही में नालंदा जिले के नूरसराय प्रखंड स्थित डोईया गांव को सोलर मॉडल गांव के रूप में विकसित किया गया है।




गुजरात का मोढेरा गांव देश के पहले सोलर विलेज के रूप में विकसित किया गया है। यहां सौर ऊर्जा के जरिए बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। गांव में ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्लांट और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाया गया है।



मोढेरा में घरों की छतों पर भी सोलर पैनल लगाए गए हैं। सौर ऊर्जा के उत्पादन और स्टोरेज की व्यवस्था के जरिए गांव में बिजली की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम किया गया है। बिहार में प्रस्तावित सोलर विलेज योजना का उद्देश्य भी ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना और अधिक से अधिक सोलर सिस्टम लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता