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Bihar Smart Meter : बिहार में बिजली चोरी करने वालों की अब खैर नहीं! स्मार्ट मीटर कंपनियों को मिली नई ताकत

बिहार में बिजली चोरी रोकने के लिए बड़ा कदम। अब स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियां ट्रांसफार्मर स्तर पर इनर्जी अकाउंटिंग करेंगी और बिजली खपत व बिलिंग का विश्लेषण कर गड़बड़ियों की पहचान करेंगी।

Bihar Smart Meter : बिहार में बिजली चोरी करने वालों की अब खैर नहीं! स्मार्ट मीटर कंपनियों को मिली नई ताकत
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar Smart Meter : बिहार में बिजली चोरी रोकने और बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बिजली कंपनियों ने बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों को अगले दस वर्षों तक ऊर्जा लेखांकन यानी इनर्जी अकाउंटिंग का जिम्मा भी सौंपा गया है। इस नई व्यवस्था के तहत कंपनियां क्षेत्रवार बिजली आपूर्ति और उपभोक्ताओं की खपत का विश्लेषण करेंगी तथा बिजली चोरी या बिलिंग में गड़बड़ी की पहचान कर बिजली कंपनियों को रिपोर्ट देंगी।


बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इनर्जी अकाउंटिंग व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य तकनीकी माध्यमों से बिजली की चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। इसके लिए राज्य के विभिन्न इलाकों में लगाए गए बिजली वितरण ट्रांसफार्मरों की लगातार निगरानी की जाएगी। बिजली कंपनियों का मानना है कि इससे राजस्व हानि कम होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।


दरअसल, बिजली वितरण नेटवर्क में लगे पावर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मरों पर विशेष सिम आधारित डिवाइस लगाए गए हैं। ये उपकरण ट्रांसफार्मर से वितरित होने वाली बिजली की पूरी जानकारी रियल टाइम में बिजली कंपनी के सर्वर तक पहुंचाते हैं। इससे यह पता चलता है कि किसी क्षेत्र में कुल कितनी बिजली आपूर्ति की गई है।


इसके बाद संबंधित क्षेत्र के उपभोक्ताओं द्वारा उपयोग की गई बिजली और उनके बिलिंग डेटा का मिलान किया जाता है। यदि ट्रांसफार्मर से सप्लाई की गई बिजली और उपभोक्ताओं के बिल के बीच बड़ा अंतर पाया जाता है तो उसे चिन्हित किया जाता है। इसी प्रक्रिया को इनर्जी अकाउंटिंग कहा जाता है।


नई व्यवस्था के तहत जिस कंपनी ने किसी क्षेत्र में स्मार्ट प्रीपेड मीटर स्थापित किए हैं, उसी कंपनी को वहां इनर्जी अकाउंटिंग की जिम्मेदारी भी दी गई है। कंपनी यह जांच करेगी कि ट्रांसफार्मर से आपूर्ति की गई बिजली के मुकाबले बिलिंग कम क्यों हो रही है। इसके लिए ट्रांसफार्मर से जुड़े प्रत्येक उपभोक्ता की बिजली खपत, लोड और बिलिंग पैटर्न का सूक्ष्म अध्ययन किया जाएगा।


विश्लेषण के दौरान यदि किसी उपभोक्ता के यहां बिजली की खपत अधिक पाई जाती है लेकिन उसका बिल अपेक्षाकृत कम आता है, तो इसकी भी जांच की जाएगी। साथ ही ऐसे मामलों की पहचान की जाएगी जहां स्वीकृत लोड और वास्तविक उपयोग में बड़ा अंतर हो। इससे बिजली चोरी या अनधिकृत उपयोग के मामलों को पकड़ना आसान होगा।


बिजली कंपनियां अपनी रिपोर्ट में यह भी बताएंगी कि किस क्षेत्र में बिलिंग की कमी किस कारण से हो रही है। यदि किसी इलाके में तकनीकी नुकसान के बजाय बिजली चोरी की आशंका होगी तो वहां विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई की जा सकेगी।


गौरतलब है कि बिहार में वर्तमान समय में लगभग 2.22 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से करीब 90 लाख उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। राज्य सरकार और बिजली कंपनियां तेजी से स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान चला रही हैं। आने वाले समय में जैसे-जैसे स्मार्ट मीटरों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे इनर्जी अकाउंटिंग का दायरा भी विस्तारित होता जाएगा।


ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर और इनर्जी अकाउंटिंग के संयुक्त प्रयोग से बिजली वितरण प्रणाली को अधिक आधुनिक, जवाबदेह और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। साथ ही बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होने से बिजली कंपनियों की आय बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की विद्युत सेवा उपलब्ध कराई जा सकेगी। बिहार में लागू की जा रही यह व्यवस्था बिजली प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।