Bihar News: बिहार में पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा चलाने से पहले लेनी होगी अनुमति, IPS अफसर की अरेस्टिंग के बाद सरकार का बड़ा फैसला

Bihar News: बिहार गृह विभाग ने पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की अनुमति अनिवार्य कर दी, यह नियम बीएनएसएस 2023 की धारा 218(2) पर आधारित है।

1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Feb 26, 2026, 9:47:42 PM

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Bihar News: बिहार गृह विभाग ने पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। यह अधिसूचना बीएनएसएस 2023 की धारा 218(2) के तहत जारी की गई है और हाल ही में बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार नायक की गिरफ्तारी के प्रयास से जुड़ी घटनाओं को ध्यान में रखकर लाई गई है।


अब राज्य में किसी भी स्थान पर पदस्थापित बिहार पुलिस के सभी वर्ग एवं प्रवर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुकदमा चलाने के लिए संबंधित प्राधिकारी को बिहार सरकार से अनुमति लेनी होगी। अधिसूचना के अनुसार, बीएनएसएस 2023 की धारा 218 की उपधारा (2) में उल्लिखित “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर “राज्य सरकार” को लागू माना जाएगा।


बीएनएसएस धारा 218(2) के तहत यह नियम इस उद्देश्य से बनाया गया है कि ड्यूटी से संबंधित कार्यों के लिए पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक या मनमाने अभियोजन से पुलिस के कामकाज में बाधा न आए। गृह विभाग की यह नई अधिसूचना राज्य में पुलिस अधिकारियों की सुरक्षा और कार्यकुशलता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


बता दें कि बिहार अग्निशमन विभाग के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) एम. सुनील नायक को आंध्र प्रदेश पुलिस ने पिछले दिनों पटना से गिरफ्तार किया था। आंध्र प्रदेश की टीम ने उनके सरकारी आवास, जो चिड़ियाघर के पास स्थित है, पर दबिश दी थी। इस दौरान पटना सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह भी मौके पर मौजूद रहे थे। गिरफ्तार करने के बाद नायक को सिविल कोर्ट में पेश किया गया था, जहां उन्हें बड़ी राहत मिली थी। कोर्ट ने ट्रांजिट रिमांड की मांग को रिफ्यूज कर दिया था।


मामला वर्ष 2021 का है, जब सुनील नायक आंध्र प्रदेश में प्रतिनियुक्ति पर थे। उस समय उन्होंने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के सांसद के. रघुराम कृष्णा राजू को गिरफ्तार किया था। सांसद ने आरोप लगाया था कि गिरफ्तारी के दौरान उन्हें प्रताड़ित किया गया। इसी आरोप के आधार पर प्रकाशम जिले की पुलिस ने नायक के खिलाफ मामला दर्ज किया था। 


बाद में नोटिस भेजकर बयान दर्ज कराने का प्रयास किया गया, लेकिन नायक पेश नहीं हुए। सुनील नायक वर्ष 2019 में आंध्र प्रदेश प्रतिनियुक्ति पर गए थे और लगभग तीन साल तक वहां तैनात रहे। वर्ष 2024 में तेलुगु देशम पार्टी की सरकार बनने के बाद वे अपने मूल कैडर बिहार लौट आए। वर्तमान में वे डिप्टी आईजी (अग्निशमन सेवा) के पद पर कार्यरत थे।