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Bihar Police: सीमावर्ती थानों में कमजोर नेटवर्क चिंता का विषय, चुनाव से पहले इस गंभीर समस्या के समाधान में जुटी बिहार पुलिस

Bihar Police: बिहार के सीमावर्ती थानों में कमजोर नेटवर्क को ठीक करने की पुलिस ने बनाई योजना। शैडो जोन थानों की सूची तैयार, टेलीकॉम कंपनियों से समन्वय। भागलपुर, किशनगंज जैसे जिलों में समस्या ज्यादा..

Bihar Police
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar Police: बिहार के सीमावर्ती इलाकों में स्थित पुलिस थानों की नेटवर्क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने अब बड़े कदम उठाए हैं। शैडो जोन यानी बिना नेटवर्क वाले क्षेत्रों में आने वाले थानों की तेजी से पहचान की जा रही है और इनकी सूची जिला पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से तैयार हो रही है। यह प्रयास विधानसभा चुनाव 2025 से पहले किया जा रहा है ताकि तकनीकी दिक्कतों से बचा जा सके।


1 सितंबर से सभी थानों के मोबाइल नंबर बदल दिए गए हैं, जिससे कॉल करने में कोई समस्या न हो। नेपाल सीमा से सटे जिलों जैसे भागलपुर, बांका, जमुई, लखीसराय, किशनगंज, अररिया, सुपौल, सहरसा और मधेपुरा के ग्रामीण थानों में नेटवर्क की कमी से तत्काल सूचना आदान-प्रदान में बाधा आती है। कई जगहों पर भारतीय नेटवर्क के बजाय नेपाली सिग्नल मजबूत हो जाते हैं, जिससे गोपनीय जानकारी लीक होने का खतरा रहता है।


पुलिस मुख्यालय ने अब एक विस्तृत योजना तैयार की है, जिसमें टेलीकॉम कंपनियों से समन्वय स्थापित कर टावर लगवाए जाएंगे। जहां जरूरी हो, वहां वायरलेस और मोबाइल सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा। अररिया और सुपौल जैसे जिलों के नेपाल सीमा से सटे थानों में यह समस्या सबसे गंभीर है, जहां मोबाइल फोन अक्सर काम ही नहीं करता।


इससे पुलिसकर्मियों को आपात स्थिति में संचार में परेशानी होती है। ऐसे में अब चुनाव से पहले यह कदम महत्वपूर्ण है, क्योंकि बॉर्डर क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने की जरूरत काफी ज्यादा है। नेपाल के साथ 729 किलोमीटर लंबी खुली सीमा होने से घुसपैठ का खतरा भी खूब रहता है और मजबूत नेटवर्क से इसे रोकना आसान होगा।


यह योजना बिहार पुलिस की समग्र सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। हाल ही में पाहलगाम हमले के बाद नेपाल बॉर्डर पर सतर्कता बढ़ाई गई है और चुनाव के मद्देनजर अब घुसपैठियों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस मुख्यालय का कहना है कि शैडो जोन थानों की सूची जल्द पूरी हो जाएगी और समस्याग्रस्त क्षेत्रों में तुरंत सुधार होगा। इससे न केवल संचार विश्वसनीय बनेगा बल्कि चुनाव प्रक्रिया भी सुरक्षित रहेगी। स्थानीय लोग भी इस कदम का स्वागत कर रहे हैं क्योंकि इससे अपराध नियंत्रण और आपात सहायता में सुधार होगा।