पटना: बिहार में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर परिसीमन की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतों के परिसीमन से जुड़े डाटा में जरूरी सुधार कर उसे आयोग के पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया है। वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाकर तैयार किए गए आंकड़ों की जांच के दौरान कुछ कमियां सामने आने के बाद संबंधित जिलों को डाटा दुरुस्त करने को कहा गया था। अब संशोधन के बाद बुधवार को आंकड़े आयोग के पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से सभी जिलाधिकारियों को परिसीमन से संबंधित डाटा की जांच और उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपलोड करने की जिम्मेदारी दी गई है। आयोग ने आंकड़ों की प्रमाणिकता को लेकर भी विशेष व्यवस्था की है। पोर्टल पर अपलोड किए जाने वाले डाटा पर संबंधित जिलाधिकारी का डिजिटल हस्ताक्षर अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि पोर्टल पर दर्ज आंकड़े संबंधित जिला प्रशासन की ओर से सत्यापित हैं।
तैयार डाटा में मिली थीं कमियां
पंचायती राज विभाग की ओर से परिसीमन को लेकर पहले डाटा तैयार किया गया था। आयोग के स्तर पर इसकी जांच के दौरान कुछ आंकड़ों में संशोधन की जरूरत बताई गई। इसके बाद जिलों को संबंधित डाटा की दोबारा समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए गए। इसी वजह से परिसीमन से जुड़ी प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे नहीं बढ़ सकी।
अब जिला प्रशासन की ओर से संशोधित आंकड़ों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि डाटा अपलोड करने से पहले राजस्व ग्रामवार जनसंख्या और पंचायतों की मौजूदा स्थिति का अच्छी तरह मिलान कर लिया जाए।
आज पोर्टल पर अपलोड होंगे आंकड़े
मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव ने बताया कि आयोग के निर्देश के अनुसार आंकड़ों में आवश्यक सुधार किया जा रहा है। संशोधित डाटा को बुधवार को आयोग के पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर डाटा की बारीकी से जांच की जा रही है।
परिसीमन के इस चरण में प्रखंड और पंचायतों की वर्तमान स्थिति के अनुसार राजस्व ग्रामवार जनसंख्या के आंकड़ों की एंट्री की जा रही है। प्रत्येक स्तर पर आंकड़ों के मिलान और सत्यापन के बाद ही उन्हें पोर्टल पर दर्ज किया जा रहा है।
2011 की जनगणना होगी आधार
पंचायत परिसीमन की पूरी प्रक्रिया वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। जनसंख्या के आंकड़ों के साथ संबंधित राजस्व ग्राम और पंचायत की वर्तमान भौगोलिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जा रहा है। आयोग का प्रयास है कि परिसीमन के दौरान इस्तेमाल होने वाले आंकड़ों में किसी तरह की विसंगति न रहे।
एक बार डाटा आयोग के पोर्टल पर अपलोड होने के बाद उसके आधार पर आगे की परिसीमन प्रक्रिया शुरू होगी। यही वजह है कि जिला प्रशासन को आंकड़ों की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।
1981 की जनगणना के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे
परिसीमन की प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड का भी सहारा लिया जा रहा है। अधिकारियों को वर्ष 1984-85 में 1981 की जनगणना के आधार पर हुए परिसीमन से संबंधित जिला गजट और उपलब्ध रिकॉर्ड का अध्ययन करने को कहा गया है। पुराने परिसीमन के दस्तावेजों की जानकारी को वर्तमान स्थिति से मिलाकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
करीब चार दशक बाद पंचायत स्तर पर परिसीमन की प्रक्रिया होने के कारण इसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों की मौजूदा सीमाओं में बदलाव की संभावना है। हालांकि अंतिम बदलाव परिसीमन की पूरी प्रक्रिया और आयोग की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
पंचायत चुनाव की तैयारी में अहम कदम
बिहार में पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पंचायतों और वार्डों की सीमाओं से संबंधित आंकड़े अंतिम रूप लेने के बाद चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। संभावित रूप से परिसीमन के कारण कई वार्डों की सीमाएं बदल सकती हैं और कुछ गांवों का पंचायत क्षेत्र भी बदल सकता है। फिलहाल राज्य निर्वाचन आयोग का जोर डाटा को सही, प्रमाणित और अपडेट करने पर है। जिलों से संशोधित आंकड़े पोर्टल पर अपलोड होने के बाद आयोग इनका परीक्षण करेगा। इसके बाद परिसीमन की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
ऐसे में बुधवार को आयोग के पोर्टल पर अपलोड होने वाले आंकड़े आगामी पंचायत चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। डाटा में सुधार के बाद अब प्रशासन की नजर आयोग की अगली प्रक्रिया और परिसीमन के अंतिम स्वरूप पर रहेगी।





