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Bihar News: प्रदूषण घटने के बावजूद नहाने लायक नहीं गंगा, अब इस वजह से विशेषज्ञों ने जारी की चेतावनी

Bihar News: बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, बक्सर से कहलगांव तक गंगा के 34 स्थानों पर फेकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया में 4-10 गुना कमी आई..

Bihar News
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार में गंगा नदी के प्रदूषण स्तर में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है, लेकिन इसके बावजूद यह अभी भी स्नान करने के लिए या पीने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद ने चौसा से कहलगांव तक 34 स्थानों पर लिए गए जल नमूनों की जांच के बाद रिपोर्ट जारी की है, जिसमें फेकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा में भारी कमी दर्ज की गई। पिछले चार वर्षों के आंकड़ों को देखें तो पहले कई घाटों पर यह बैक्टीरिया लाखों MPN प्रति 100 मिलीलीटर तक था, मगर अब यह हजारों में सिमट गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण और नमामी गंगे परियोजना के प्रभाव से यह कमी आई है।


फेकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मानव और पशु मल से उत्पन्न होता है जो नदी में सीधे छोड़े जाने से फैलता है। यह बैक्टीरिया जल में ऑक्सीजन की मात्रा घटाता है, जलीय जीवन को नुकसान पहुंचाता है और स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुसार, स्नान के लिए पानी में फेकल कोलीफॉर्म 2500 MPN/100ml से कम होना चाहिए, जबकि पीने के लिए 500 MPN/100ml या उससे कम। बिहार में अधिकांश स्थानों पर यह स्तर अभी भी ऊंचा है, हालांकि 4 से 10 गुना कमी से सुधार की उम्मीद जगी है। BSPCB चेयरमैन डीके शुक्ला ने कहा कि यदि यही गति बनी रही तो एक-दो वर्षों में 34 में से 24 स्थानों पर पानी नहाने लायक हो सकता है।


रिपोर्ट के अनुसार, गंगा जल की सबसे अच्छी गुणवत्ता दानापुर के पीपापुल घाट पर पाई गई, जहां बैक्टीरिया स्तर मानक के करीब पहुंचा है। बक्सर, पटना, भागलपुर जैसे क्षेत्रों में भी कमी आई है, लेकिन बिहार के उत्तरी भागों में अभी चुनौतियां बरकरार हैं। नमामी गंगे योजना के तहत बिहार में 20 से अधिक STP स्थापित हो चुके हैं, जिनकी क्षमता 500 MLD से अधिक है, लेकिन अपूर्ण परियोजनाएं और ग्रामीण क्षेत्रों से अनुपचारित अपशिष्ट अभी भी समस्या बने हुए हैं। CPCB की 2025 की रिपोर्ट में भी बिहार के 34 निगरानी स्टेशनों पर फेकल कोलीफॉर्म स्तर मानक से अधिक पाया गया, जो स्वास्थ्य जोखिम जैसे पेट संबंधी संक्रमण, त्वचा रोग और जलजनित बीमारियों को बढ़ावा देता है।


परिषद ने आगे की कार्रवाई के लिए STP की क्षमता बढ़ाने, नियमित निगरानी और जागरूकता अभियान की बात कही है। यदि सुधार जारी रहा तो गंगा की सफाई में बिहार महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। फिलहाल, घाटों पर स्नान करने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि उच्च बैक्टीरिया स्तर से गंभीर स्वास्थ्य खतरे हो सकते हैं।