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Bihar News: पिछले 6 महीने में ₹करोड़ों की नकली दवाई खरीद चुके बिहार के लोग, दर्जन भर से ज्यादा दुकानों का लाइसेंस रद्द

Bihar News: पटना में औषधि नियंत्रक की छापेमारी से नकली दवाओं का बड़ा खुलासा। छह महीने में करोड़ों की बिक्री, 38 सैंपल फेल, कई में पाउडर भरा। नामी दवाएं भी नकली, 16 दुकानों का लाइसेंस रद्द..

Bihar News
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
4 मिनट

Bihar News: बिहार की राजधानी पटना में नकली दवाओं का एक बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है जो वर्षों से मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहा था। औषधि नियंत्रक प्रशासन की हालिया कार्रवाई ने इस गोरखधंधे की परतें खोल दीं हैं। इस वर्ष अब तक करोड़ों रुपये की नकली दवाओं की बिक्री हुई है, गोविंद मित्रा रोड से लेकर परसा बाजार तक इन बिक्री करने वाले दुकानों की संख्या अच्छी खासी है। इन दवा दुकानों से लिए गए 38 सैंपल फेल पाए गए, जिनमें कई नामी दवाओं में जरूरी दवाइयां नहीं बल्कि साधारण पाउडर भरा था। इससे सैकड़ों मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है क्योंकि बीमारी से राहत की उम्मीद में वे लगातार जहरीली या बेअसर दवाएं ले रहे थे। विभाग ने 16 दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं और दोषी कंपनी व दुकानदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।


औषधि नियंत्रक नित्यानंद क्रिशलय की अगुवाई में गठित टीम ने थोक दवा बाजार और आसपास के क्षेत्रों में छापेमारी की है। 16 दुकानों से लिए गए नमूनों की जांच में 38 दवाएं मानक पर खरी नहीं उतरीं। इनमें दर्द, बुखार, सर्दी-जुकाम, ब्लड प्रेशर, शुगर और एंटीबायोटिक दवाएं शामिल थीं। चौंकाने वाली बात यह रही कि टेक्सिम, स्पैक्सिम जैसी एंटीबायोटिक्स, डेक्सामेथासोन इंजेक्शन और एंटी-एलर्जिक जेंटामाइसिन जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं में 72 प्रतिशत तक पाउडर भरा था। इन दवाओं में सक्रिय तत्व (सॉल्ट) की कमी से मरीजों को न राहत मिली और न ही उनका इलाज हुआ बल्कि कई मामलों में स्थिति और भी बिगड़ गई। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नकली दवाएं 10 रुपये की लागत पर 100 रुपये तक बेची जा रही थीं, जिससे कारोबारियों को भारी मुनाफा हो रहा था।


परसा बाजार के कुरथौल इलाके में स्थित एक कंपनी नकली दवा निर्माण का केंद्र पाई गई। यहां से डेक्सामेथासोन, जेंटामाइसिन, वारमोलिन और अन्य इंजेक्शन जब्त किए गए। प्रारंभिक जांच में पता चला कि कंपनी की खरीद बहुत कम थी लेकिन बाजार में बिक्री असामान्य रूप से ज्यादा। इससे अन्य कंपनियों पर शक हुआ और पूरा नेटवर्क उजागर हो गया है। यह कारोबार केवल पटना तक सीमित नहीं बल्कि बिहार के कई जिलों में फैला था। जांच एजेंसियों का अनुमान है कि यह गोरखधंधा वर्षों से चल रहा था और सैकड़ों मरीजों को इसका शिकार होना पड़ा। नकली दवाओं के सेवन से कई मरीजों की हालत गंभीर हो गई क्योंकि वे असली इलाज से वंचित रहे।


विभाग ने दोषी पाए गए दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। 16 दुकानों के लाइसेंस रद्द हो चुके हैं और मुकदमा दर्ज कर जांच जारी है। औषधि नियंत्रक ने कहा कि नकली दवाओं के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था की जड़ें मजबूत हों। मरीजों को सलाह दी गई है कि वे हमेशा लाइसेंस्ड दुकानों से दवाएं खरीदें और संदिग्ध दवाओं की जांच कराएं। सरकार ने भी इस मुद्दे पर सख्ती का वादा किया है।