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Bihar MLC Election 2026 : बिहार MLC चुनाव का बिगुल बजा! 10 सीटों पर नामांकन शुरू, क्या विपक्ष को क्लीन स्वीप करेगी NDA?

बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। एक सीट पर उपचुनाव भी होगा। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर NDA को बड़ा फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है। पूरी खबर पढ़ें।

Bihar MLC Election 2026 : बिहार MLC चुनाव का बिगुल बजा! 10 सीटों पर नामांकन शुरू, क्या विपक्ष को क्लीन स्वीप करेगी NDA?
Tejpratap
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Bihar MLC Election 2026 : बिहार विधान परिषद की 10 रिक्त सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया सोमवार से औपचारिक रूप से शुरू हो गई। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार उम्मीदवार आज से नामांकन दाखिल कर सकेंगे। इन सीटों में एक सीट पर उपचुनाव भी कराया जा रहा है, जबकि शेष नौ सीटों के लिए नियमित चुनाव होंगे। राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का पलड़ा भारी माना जा रहा है।


निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून निर्धारित की गई है। नामांकन पत्रों की जांच 9 जून को होगी, जबकि उम्मीदवार 11 जून तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। यदि आवश्यक हुआ तो 18 जून को मतदान कराया जाएगा और उसके बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।


इस चुनाव की सबसे चर्चित सीट पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट है, जिस पर उपचुनाव कराया जा रहा है। नीतीश कुमार ने विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र दिया था, जिसके बाद यह सीट रिक्त हो गई। इस सीट का कार्यकाल मई 2030 तक शेष है, इसलिए यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।


इसके अलावा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने के कारण भी एक सीट खाली हुई है। सम्राट चौधरी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद विधायक निर्वाचित हो चुके हैं, जिसके बाद उन्हें परिषद की सदस्यता छोड़नी पड़ी। इसी तरह पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के इस्तीफे से एक अन्य सीट रिक्त हुई है।


जदयू नेता श्रीभगवान सिंह कुशवाहा के जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने जाने के बाद उनकी परिषद सदस्यता भी समाप्त हो गई थी। इन सभी कारणों से कुल 10 सीटें खाली हुई हैं, जिन पर अब चुनाव कराया जा रहा है।


राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो रिक्त हुई सीटों में पांच सीटें जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के खाते की हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की दो-दो सीटें खाली हुई हैं। एक सीट कांग्रेस के हिस्से की है। इस प्रकार रिक्त सीटों में सात सीटें एनडीए और तीन सीटें महागठबंधन के खाते की मानी जा रही हैं।


हालांकि वर्तमान विधानसभा में दलों की संख्या के आधार पर समीकरण पहले की तुलना में बदल चुके हैं। विधानसभा में एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण परिषद चुनाव में उसे अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महागठबंधन के लिए एक से अधिक सीट जीतना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में एनडीए को दो अतिरिक्त सीटों का फायदा मिल सकता है।


विधान परिषद की जिन नौ सीटों पर नियमित चुनाव हो रहे हैं, उनका कार्यकाल 28 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। जबकि नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट का कार्यकाल 6 मई 2030 तक है। यही वजह है कि इस सीट पर अलग से उपचुनाव कराया जा रहा है।


बिहार की राजनीति में इस चुनाव को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके परिणाम विधान परिषद में दलों की ताकत को प्रभावित करेंगे। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अपनी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती दिखाने का अवसर भी माना जा रहा है। अब सभी की नजरें नामांकन प्रक्रिया और उम्मीदवारों की घोषणा पर टिकी हुई हैं, जिससे चुनावी मुकाबले की तस्वीर और साफ हो सकेगी।