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Bihar News: बिहार सरकार के युवा मंत्री को हुए बीमार, इस अस्पताल में चल रहा है इलाज

Bihar News: बिना चुनाव लड़े मंत्री बनने को लेकर विपक्ष के निशाने पर आए बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश अब स्वास्थ्य कारणों से सुर्खियों में हैं। उन्हें टायफाइड हो गया है और डॉक्टरों ने उन्हें पूर्ण विश्राम की सलाह दी है।

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PRIYA DWIVEDI
5 मिनट

Bihar News: बिना चुनाव लड़े मंत्री बनने को लेकर विपक्ष के निशाने पर आए बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश अब स्वास्थ्य कारणों से सुर्खियों में हैं। उन्हें टायफाइड हो गया है और डॉक्टरों ने उन्हें पूर्ण विश्राम की सलाह दी है। हाल ही में शपथ लेने के बाद वे लगातार राजनीतिक विवादों का सामना कर रहे थे, ऐसे में बीमारी के बीच भी वे अपने सरकारी कामों को प्राथमिकता दे रहे हैं।


मंत्री दीपक प्रकाश ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया, “पिछले एक हफ्ते से टाइफाइड से पीड़ित हूं। डॉक्टर ने दवा के साथ बेड रेस्ट की सलाह दी है। नई जिम्मेदारी इतनी बड़ी है कि शरीर को उचित आराम नहीं दे पा रहा हूं। बीमारी से सही रिकवरी नहीं हो पा रही है। अगले 2-3 दिन सरकारी कार्य करता रहूंगा, परन्तु शुभचिंतकों से मिलना थोड़ा कम रहेगा।” उन्होंने संदेश में यह भी बताया कि जनता की सेवा और जिम्मेदारी उनके लिए सर्वोपरि है, इसलिए बीमारी के बावजूद कुछ दिनों तक जरूरी सरकारी कार्य वे स्वयं करते रहेंगे।


दीपक प्रकाश का एक वीडियो कुछ दिनों पहले वायरल हुआ था, जिसमें वे पत्रकारों से बातचीत करने से मना करते नज़र आए थे। उन्होंने कहा था- “मेरा समय बर्बाद न करें। प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार ने जो भरोसा दिखाया है, उस पर खरा उतरना है। मेरा हर मिनट जनता के विकास के लिए है।” इस बयान को लेकर विपक्ष ने उन्हें घेरते हुए कहा था कि जनता और मीडिया से दूरी बनाकर एक जनप्रतिनिधि कैसे काम करेगा?


मंत्री के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर नीतीश कुमार का पुराना बयान याद दिलाते हुए लिखा-“खाना खाते वक्त मक्खियाँ भनभनाएंगी। चिंता मत कीजिए। बाएं हाथ से भगाते रहिए, दाएं हाथ से खाते रहिए।” उनके इस बयान को दीपक प्रकाश पर हो रहे ट्रोलिंग और आलोचनाओं का जवाब माना जा रहा है।


बिहार में हाल ही में नई कैबिनेट के गठन के बाद मंत्रियों की कार्यशैली और नियुक्ति को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे में दीपक प्रकाश की बीमारी और राजनीतिक गर्माहट दोनों ने उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है। माना जा रहा है कि स्वास्थ्य सुधार के बाद वे विभागीय बैठकों और पंचायत स्तरीय कार्यक्रमों में तेजी ला सकते हैं


Bihar News: बिना चुनाव लड़े मंत्री बनने को लेकर विपक्ष के निशाने पर आए बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश अब स्वास्थ्य कारणों से सुर्खियों में हैं। उन्हें टायफाइड हो गया है और डॉक्टरों ने उन्हें पूर्ण विश्राम की सलाह दी है। हाल ही में शपथ लेने के बाद वे लगातार राजनीतिक विवादों का सामना कर रहे थे, ऐसे में बीमारी के बीच भी वे अपने सरकारी कामों को प्राथमिकता दे रहे हैं।


मंत्री दीपक प्रकाश ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया, “पिछले एक हफ्ते से टाइफाइड से पीड़ित हूं। डॉक्टर ने दवा के साथ बेड रेस्ट की सलाह दी है। नई जिम्मेदारी इतनी बड़ी है कि शरीर को उचित आराम नहीं दे पा रहा हूं। बीमारी से सही रिकवरी नहीं हो पा रही है। अगले 2-3 दिन सरकारी कार्य करता रहूंगा, परन्तु शुभचिंतकों से मिलना थोड़ा कम रहेगा।” उन्होंने संदेश में यह भी बताया कि जनता की सेवा और जिम्मेदारी उनके लिए सर्वोपरि है, इसलिए बीमारी के बावजूद कुछ दिनों तक जरूरी सरकारी कार्य वे स्वयं करते रहेंगे।


दीपक प्रकाश का एक वीडियो कुछ दिनों पहले वायरल हुआ था, जिसमें वे पत्रकारों से बातचीत करने से मना करते नज़र आए थे। उन्होंने कहा था- “मेरा समय बर्बाद न करें। प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार ने जो भरोसा दिखाया है, उस पर खरा उतरना है। मेरा हर मिनट जनता के विकास के लिए है।” इस बयान को लेकर विपक्ष ने उन्हें घेरते हुए कहा था कि जनता और मीडिया से दूरी बनाकर एक जनप्रतिनिधि कैसे काम करेगा?


मंत्री के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर नीतीश कुमार का पुराना बयान याद दिलाते हुए लिखा-“खाना खाते वक्त मक्खियाँ भनभनाएंगी। चिंता मत कीजिए। बाएं हाथ से भगाते रहिए, दाएं हाथ से खाते रहिए।” उनके इस बयान को दीपक प्रकाश पर हो रहे ट्रोलिंग और आलोचनाओं का जवाब माना जा रहा है।


बिहार में हाल ही में नई कैबिनेट के गठन के बाद मंत्रियों की कार्यशैली और नियुक्ति को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे में दीपक प्रकाश की बीमारी और राजनीतिक गर्माहट दोनों ने उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है। माना जा रहा है कि स्वास्थ्य सुधार के बाद वे विभागीय बैठकों और पंचायत स्तरीय कार्यक्रमों में तेजी ला सकते हैं।